पटना, 03 फरवरी 2026

जल-जीवन-हरियाली दिवस के अवसर पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य प्रभाग द्वारा विभागीय सभागार में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत “नए जलस्रोतों का सृजन – निजी भूमि पर चौर विकास” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ सचिव शीर्षत कपिल अशोक द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

उक्त कार्यक्रम में निदेशक, मत्स्य तुषार सिंगला, मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेशक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग एस. चंद्रशेखर, मिशन निदेशक, जल-जीवन-हरियाली सुमित कुमार,विशेष सचिव गीता सिंह तथा अपर सचिव स्मिता सिंह भी उपस्थित रहीं।

सचिव, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग शीर्षत कपिल अशोक ने जल-जीवन-हरियाली दिवस के अवसर पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य प्रभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम “नए जलस्रोतों का सृजन” (निजी भूमि पर चौर विकास) विषयक परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि जल-जीवन-हरियाली राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी योजनाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि यह योजना सरकार की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहाँ जल संरक्षण और हरियाली के संवर्धन को केंद्रीय महत्व दिया गया है।
उन्होंने कहा कि आज चाहे संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा हो या केंद्रीय बजट, हर स्तर पर जलवायु परिवर्तन को प्राथमिकता दी जा रही है। जल-जीवन-हरियाली योजना इसी वैश्विक सोच के अनुरूप है, जो जल संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास को मजबूती प्रदान करती है। सचिव महोदय ने कहा कि इस पहल के केंद्र में पर्यावरण है और यह केवल एक योजना नहीं बल्कि एक मिशन है।
उन्होंने कहा कि हमें उपलब्ध संभावनाओं और वास्तविक उत्पादन के बीच के अंतर को समाप्त करना होगा। साथ ही सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि निजी भूमि पर चौर विकास के अंतर्गत नए जलस्रोतों के सृजन कार्य को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख ढंग से क्रियान्वित किया जाए।

निदेशक, मत्स्य तुषार सिंगला ने बताया कि अन्य विभागों के अधीन जलकरों में मत्स्य पालन के माध्यम से न केवल आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, बल्कि जल की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तालाबों एवं जलकरों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए मिशन मोड में सीमांकन, अतिक्रमण मुक्त कर जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे ग्रामीणों को इसके लाभों की जानकारी मिलेगी। अभियान के तहत सृजित जलकरों में मत्स्य उत्पादन बढ़ने से ग्रामीणों की आजीविका में वृद्धि हो रही है तथा पानी की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग इस अभियान के उद्देश्यों की पूर्ति एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु सभी विभागों को आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर है।

जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इस संसूचित कार्यक्रम का नोडल विभाग ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना है। कार्यक्रम के आलोक में जनवरी 2026 से दिसंबर 2026 तक प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को संबंधित विभागों द्वारा जल-जीवन-हरियाली दिवस का आयोजन किया जाना निर्धारित है। इसी क्रम में माह फरवरी 2026 के प्रथम मंगलवार, अर्थात् आज दिनांक 03.02.2026 को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार के मत्स्य प्रभाग द्वारा संबंधित क्रियान्वयन विभागों के सहयोग से जल-जीवन-हरियाली दिवस का आयोजन किया जा रहा है।
जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत राज्यभर में विभिन्न विभागों द्वारा अनेक स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है। इसके लिए नवीन एवं परंपरागत संचार माध्यमों का उपयोग कर जनमानस में जागरूकता लाई जा रही है। अभियान के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु जल-जीवन-हरियाली मिशन के माध्यम से अंतर्विभागीय समन्वय एवं अनुश्रवण किया जा रहा है। साथ ही, योजनाओं की अद्यतन प्रगति, बेहतर क्रियान्वयन एवं जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जल-जीवन-हरियाली पोर्टल एवं मोबाइल ऐप विकसित किया गया है।

कार्यक्रम में संयुक्त मत्स्य निदेशक (रा.प.ई.) दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि बिहार आर्द्रभूमि से समृद्ध राज्य है, जहाँ लगभग 9.41 लाख हेक्टेयर चैर एवं वेटलैंड क्षेत्र उपलब्ध है। इन निजी चैर भूमियों को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के माध्यम से विकसित कर मत्स्य, कृषि एवं बागवानी उत्पादन बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि समेकित चैर विकास योजना से अगले पाँच वर्षों में 30,000 हेक्टेयर जलक्षेत्र का विकास, एक लाख टन से अधिक अतिरिक्त उत्पादन, 50,000 भू-धारियों को लाभ तथा 60,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।

कार्यक्रम का समापन संयुक्त मत्स्य निदेशक (मु.) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर यह संकल्प व्यक्त किया गया कि बिहार को सुंदर, हरित एवं स्वच्छ बनाए रखने के लिए सतत प्रयास किए जाएंगे तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना, पारिस्थितिकीय संतुलन का संरक्षण और पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में समन्वित कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे तथा राज्य के सभी जिलों के जिला मत्स्य पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े रहे।

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