पटना, 02 अक्टूबर 2026
सत्य, अहिंसा और सादगी के प्रतीक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को देशरत्न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दीप प्रज्वलन और महापुरुषों को पुष्पांजलि अर्पित कर शुरू हुए इस समारोह में शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा के साथ-साथ गंभीर वैचारिक परिचर्चा भी संपन्न हुई।

उर्दू भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त आईएएस) विजय प्रकाश ने अपने संबोधन में भाषाई समरसता पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि उर्दू किसी एक धर्म या क्षेत्र विशेष की भाषा नहीं है, बल्कि यह भारतीय भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का वह अभिन्न हिस्सा है जिसने देश के साहित्य, संवाद और राष्ट्रीय चेतना के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रार्थना सभा में गूंजे बापू के आदर्श
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की संगीत शिक्षिका कंचन कुमारी के निर्देशन में प्रशिक्षुओं ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। इसके माध्यम से गांधीजी के प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को स्वर दिया गया। द्वितीय सत्र में प्रशिक्षुओं ने पीपीटी (PPT), कविताओं और गीतों के माध्यम से गांधी एवं शास्त्री जी के जीवन दर्शन और उनके आदर्शों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।

भाषाई समन्वय पर सार्थक विमर्श
समारोह के दौरान “महात्मा गांधी और उर्दू” विषय पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन हुआ। इसमें बी.एड. (प्रथम वर्ष) के शुभम कुमार व अभिनव कश्यप और डी.एल.एड. (द्वितीय वर्ष) के मोहम्मद शाहबाज़ अनवर व गायत्री सिंह ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और विषय के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए। वहीं, महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर चन्द्रकान्त आर्य ने भाषाई विविधता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भाषाएं विभिन्न अनुभवों और संस्कृतियों के समावेश से ही अपनी वास्तविक समृद्धि पाती हैं।

विशिष्ट अतिथियों की रही उपस्थिति
इस गरिमामयी अवसर पर बिहार विद्यापीठ के सचिव डॉ. राणा अवधेश, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. श्यामानंद चौधरी (अपर सचिव), प्राचार्या डॉ. पूनम वर्मा, शिक्षा-संस्कृति एवं संग्रहालय की निदेशक डॉ. मृदुला प्रकाश, एआईसी के सीओओ श्री प्रमोद कर्ण और विद्यापीठ के संस्थापक सदस्य के पौत्र ई. प्रकाश चंद्र दास विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही।

कार्यक्रम का सफल संचालन बी.एड. प्रशिक्षु हिना परवीन एवं विशाल कुमार ने किया तथा समग्र समन्वयन सहायक प्रोफेसर डॉ. शादमा शाहीन द्वारा किया गया। समारोह का समापन सामूहिक रूप से गांधीजी के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम” के गायन के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी लोगों को राष्ट्रीय एकता और सद्भाव के सूत्र में पिरो दिया।
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