छपरा,28 अक्टूबर 2026

जिला पदाधिकारी, सारण वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभागार में जिले में बाढ़ एवं हालिया वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों की स्थिति की समीक्षा हेतु बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि क्षतिग्रस्त सड़कों का आकलन करते हुए एक सप्ताह के भीतर सभी संबंधित पथों को आवागमन योग्य (मोटरेबल) बनाना सुनिश्चित करें। इसके लिए संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं कार्यपालक अभियंताओं के बीच समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में निम्नलिखित निर्देश दिए गए :

  1. क्षतिग्रस्त पथों के निरीक्षण हेतु टीम का गठन

जिला पदाधिकारी ने बताया कि विभिन्न ग्रामीण कार्य प्रमंडलों के अंतर्गत क्षतिग्रस्त पथों के निरीक्षण एवं मरम्मत की निगरानी के लिए अलग-अलग प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं संबंधित अभियंताओं की टीमें गठित की गई हैं। संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारी कार्यपालक अभियंता के साथ समन्वय स्थापित कर पथों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे तथा मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल शुरू कराना सुनिश्चित करेंगे।

  1. एक सप्ताह में पथों को मोटरेबल बनाने का निर्देश

जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि बाढ़ एवं वर्षा के कारण जो सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर टूट गई हैं, उन्हें भी तत्काल आवागमन योग्य बनाया जाए। जिन पथों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और जहां सामान्य मरम्मत से तत्काल आवागमन संभव नहीं है, वहां आवश्यकतानुसार ईंट के टुकड़ों (ब्रिक बैट) आदि का उपयोग कर अस्थायी रूप से मोटरेबल बनाया जाए, ताकि आम लोगों को आवागमन में कठिनाई नहीं हो।

  1. ग्रामीण कार्य प्रमंडलों में निरीक्षण एवं समन्वय की जिम्मेदारी

संबंधित ग्रामीण कार्य प्रमंडलों के अंतर्गत क्षतिग्रस्त पथों के निरीक्षण एवं मरम्मत की निगरानी के लिए प्रशासनिक पदाधिकारियों तथा संबंधित अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी संबंधित पदाधिकारी अपने-अपने निर्धारित क्षेत्र में स्थलीय निरीक्षण कर मरम्मत कार्य की प्रगति सुनिश्चित करेंगे।

  1. अस्थायी मरम्मत के साथ स्थायी समाधान पर भी जोर

जिला पदाधिकारी ने कहा कि बाढ़ एवं हालिया वर्षा के कारण अत्यंत क्षतिग्रस्त सड़कों को तत्काल मोटरेबल बनाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही स्थायी मरम्मत भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए क्षति का तकनीकी आकलन करते हुए बिटुमिनस पथ निर्माण एवं मरम्मत कार्य हेतु प्राक्कलन तैयार कर विभाग को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्थायी मरम्मत के बाद स्थायी समाधान की कार्रवाई में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

  1. आरसीडी की सड़कों का 13 बिंदुओं पर निरीक्षण

पथ निर्माण विभाग (RCD) की सड़कों की स्थिति की समीक्षा के लिए जिला पदाधिकारी ने संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारियों को निर्धारित 13 बिंदुओं के आधार पर निरीक्षण करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान सड़कों की वास्तविक स्थिति, क्षति की प्रकृति तथा आवश्यक मरम्मत कार्यों का आकलन किया जाएगा। संबंधित पदाधिकारी निर्धारित प्रपत्र में निरीक्षण प्रतिवेदन समर्पित करेंगे तथा की गई कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को एक सप्ताह के भीतर पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

6.ओ पीआरएमसी के अंतर्गत आने वाले पथों के रखरखाव पर विशेष ध्यान

जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि ओपीआरएमसी के अंतर्गत आने वाले पथों की स्थिति किसी भी परिस्थिति में खराब नहीं होनी चाहिए। इन पथों के नियमित रखरखाव, मरम्मत एवं अनुरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। जहां तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है, वहां बिना विलंब कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

  1. आउट ऑफ मेंटेनेंस पथों के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्देश

जिन पथों की स्थिति नियमित अनुरक्षण के अभाव में खराब है अथवा जिनकी मरम्मत सामान्य रखरखाव से संभव नहीं है, उनके लिए आवश्यकतानुसार स्थायी मरम्मत एवं पुनर्निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया। ऐसे पथों की सूची जिला प्रशासन को भी उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि उनकी स्थिति की समीक्षा एवं आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

  1. समयबद्ध कार्रवाई एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश

जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं अभियंताओं को निर्देश दिया कि निरीक्षण, क्षति का आकलन, तत्काल मरम्मत तथा स्थायी मरम्मत के लिए प्राक्कलन एवं प्रस्ताव तैयार करने की कार्रवाई निर्धारित समय-सीमा में पूरी करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ एवं वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़कों को आवागमन योग्य बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इस कार्य में संबंधित पदाधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वय एवं नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में क्षतिग्रस्त पथों की मरम्मत, आवागमन बहाली तथा स्थायी मरम्मत की कार्ययोजना को समयबद्ध ढंग से क्रियान्वित करने पर विशेष जोर दिया गया।

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