पटना, 27 जुलाई 2026

बी.डी. कॉलेज, पटना के मनोविज्ञान विभाग द्वारा सोमवार को यू.जी. सेमेस्टर–I के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिमुखीकरण एवं इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के माननीय प्राचार्य प्रो. दिवाकर प्रसाद ने की।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. दिवाकर प्रसाद ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों के विकास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, नियमित अध्ययन तथा सकारात्मक सोच के साथ अपने शैक्षणिक जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया।

मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता तिवारी ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों एवं उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) एवं चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रम, सेमेस्टर प्रणाली, क्रेडिट व्यवस्था, उपस्थिति नियम, आंतरिक मूल्यांकन, प्रायोगिक कार्य, प्रोजेक्ट कार्य तथा विश्वविद्यालय परीक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही विद्यार्थियों को शैक्षणिक, सांस्कृतिक, शोध एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. सीमा कुमारी ने विद्यार्थियों को समालोचनात्मक चिंतन, प्रभावी संप्रेषण कौशल तथा सकारात्मक अधिगम दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजीव कुमार, राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजीव कुमार तथा ए.एच.सी. एवं ए. विभागाध्यक्ष श्रीमती नीतू तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को अनुशासित, लक्ष्यनिष्ठ एवं मूल्यपरक शिक्षा ग्रहण करने का संदेश दिया।

संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, आंतरिक मूल्यांकन, प्रायोगिक परीक्षाओं, विश्वविद्यालय के नियमों, शैक्षणिक कैलेंडर तथा महाविद्यालय में उपलब्ध छात्र सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

कार्यक्रम का समापन विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता तिवारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा तथा नवप्रवेशित विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था एवं उपलब्ध अवसरों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

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