30 जुलाई 2026 पटना

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत देशभर में स्थापित किए जा रहे 12 एकीकृत एक्वा पार्कों में से एक पार्क बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में स्थापित करने की मांग उठी है। कॉफेड, बिहार के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने केंद्र सरकार से मिथिलांचल में एक आधुनिक एक्वा पार्क के साथ दो फिश लैंडिंग सेंटर स्वीकृत करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मछली मिथिला की पहचान, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए मत्स्य क्षेत्र में हो रहे राष्ट्रीय निवेश में मिथिलांचल को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

ऋषिकेश कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 713.80 करोड़ रुपये की लागत से 12 एकीकृत एक्वा पार्क स्थापित करने की मंजूरी दी है। इन पार्कों को मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कोल्ड चेन और निर्यात से जुड़ी सुविधाओं के समग्र केंद्र के रूप में विकसित किया जाना है। बिहार में, विशेष रूप से मिथिलांचल में, जल संसाधनों, तालाबों, नदियों, चौर क्षेत्रों और मछली पालन की परंपरा को देखते हुए एक्वा पार्क की स्थापना अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

उन्होंने कहा कि मिथिलांचल में मछली केवल भोजन या व्यवसाय का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में मछुआरे, मत्स्य पालक और सहकारी समितियां इस व्यवसाय से जुड़ी हैं। इसके बावजूद आधुनिक प्रसंस्करण, भंडारण, शीत शृंखला, पैकेजिंग और संगठित विपणन सुविधाओं की कमी के कारण उत्पादकों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

कॉफेड की मांग है कि मिथिलांचल में स्थापित होने वाले एक्वा पार्क में मछली बीज उत्पादन, आधुनिक हैचरी, फीड मिल, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, मत्स्य प्रसंस्करण इकाई, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट, पैकेजिंग केंद्र, प्रशिक्षण संस्थान और विपणन सुविधाएं विकसित की जाएं। इससे मछली पालन से जुड़े किसानों और सहकारी समितियों को उत्पादन से बाजार तक एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सुविधाएं मिल सकेंगी।

ऋषिकेश कश्यप ने केंद्र सरकार से मिथिलांचल के दो प्रमुख स्थानों पर आधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर स्थापित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों पर मछलियों की स्वच्छ उतराई, छंटाई, धुलाई, बर्फ की उपलब्धता, प्राथमिक प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे मछलियों की गुणवत्ता बनी रहेगी और कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि एक्वा पार्क और फिश लैंडिंग सेंटर स्थापित होने से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और मछुआरा परिवारों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। मत्स्य सहकारी समितियां मजबूत होंगी और बिहार को दूसरे राज्यों से मछली मंगाने पर होने वाली निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही मिथिला की मछली को एक विशिष्ट ब्रांड के रूप में विकसित कर राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा।

कॉफेड ने केंद्र और बिहार सरकार से संयुक्त रूप से परियोजना का व्यवहार्यता अध्ययन कराने, उपयुक्त भूमि चिह्नित करने और मिथिलांचल की मत्स्य सहकारी समितियों को परियोजना में भागीदार बनाने का आग्रह किया है। ऋषिकेश कश्यप ने कहा कि मिथिलांचल में एक्वा पार्क की स्थापना केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं होगी, बल्कि यह मछुआरा समुदाय की आय बढ़ाने, सहकारिता को मजबूत करने और बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

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