पटना, 13 अक्टूबर 2026
गंगा देवी महिला महाविद्यालय, पटना, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई में 13 अक्टूबर 2026 को साइकेट्रिक डेस्क फाउंडेशन एवं APN के सहयोग से आत्महत्या रोकथाम पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का विषय “Suicide Prevention Facilitation: Lifeline—Saving Lives in Cultural Context”है। यह कार्यक्रम तेरह एवं 14 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. रेणु कुमारी द्वारा किया जा रहा है।

मुख्य अतिथि के रूप में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के माननीय कुल सचिव प्रोफेसर अबू बक्र उपस्थित थे। मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक के रूप में नेपाल के काठमांडू विश्वविद्यालय के नेशनल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नरेन्द्र सिंह ठगुना रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की प्रो. कीर्ति उपस्थित रहीं। इस अवसर पर मनोविज्ञान विभाग की स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष प्रो. मधु पांडेय तथा परीक्षा नियंत्रक प्रो. प्रणय कुमार गुप्ता भी विशेष रूप से उपस्थित थे।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. श्यामा रॉय ने कहा कि वर्तमान समय में युवा आर्थिक दबाव और कर्ज के कारण मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऋण लेने तथा क्रेडिट कार्ड का अत्यधिक उपयोग करने से उत्पन्न आर्थिक बोझ भी उनके तनाव को बढ़ा सकता है। उन्होंने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने और समय रहते उनकी समस्याओं को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अबू बक्र ने अपने संबोधन में पीढ़ियों के बीच तनाव सहने की क्षमता और परिस्थितियों से निपटने के तरीकों में अंतर पर चर्चा की। उन्होंने वर्तमान युवा पीढ़ी की चुनौतियों को समझने तथा उन्हें भावनात्मक और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता रेखांकित की।
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. प्रणय कुमार गुप्ता ने आत्महत्या के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों के साथ-साथ जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं और उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस विषय को बहुआयामी दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता पर बल दिया।

विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष प्रो. मधु पांडेय ने कहा कि दबाव और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने में कठिनाई युवाओं में तनाव बढ़ा सकती है। उन्होंने युवाओं में तनाव प्रबंधन और भावनात्मक दृढ़ता विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया। वहीं, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की प्रॉक्टर प्रो. कीर्ति ने संयुक्त परिवार व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवार के सदस्यों के साथ भावनाओं और समस्याओं को साझा करने से व्यक्ति को भावनात्मक सहारा मिलता है। उन्होंने बदलती पारिवारिक संरचना के बीच संवाद और सहयोग की संस्कृति को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान दो सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन संरक्षण से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। विद्यार्थियों को विषय से संबंधित प्रश्नावलियाँ भी दी गईं, जिनके माध्यम से आत्महत्या संबंधी संवेदनशील मुद्दों को समझने तथा जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया।

इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर सहयोग तथा विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों में जीवन संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देना है। कार्यशाला में शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने इस गंभीर सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विषय पर संवाद को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के अंत में गंगा देवी महिला महाविद्यालय की डॉ. बिधु बाला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
![]()
