पटना/गयाजी , 29 अक्टूबर 2026

पत्र सूचना कार्यालय (PIB), पटना, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गुरुवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), बोधगया में गया जी जिले के स्थानीय पत्रकारों के लिए ‘क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला : वार्तालाप’ का आयोजन किया गया। ‘स्वस्थ युवा, नशा मुक्त भारत’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में नशे की रोकथाम, युवाओं को नशे से दूर रखने, नशा मुक्ति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा इस अभियान में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में आईआईएम बोधगया की निदेशक प्रो. विनिता एस. सहाय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। वही अति विशिष्ट अतिथि के रूप में आईजी, मगध रेंज विकास वैभव मौजूद रहे।  नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक सैयद शारिक उमर, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविकांत सिंह, यूनिसेफ की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेरणा कौल, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर धर्मेन्द्र कुमार सिंह,  तथा क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (RARI) के अनुसंधान अधिकारी अशोक कुमार सिन्हा ने भी विषय पर अपने विचार साझा किए। पत्र सूचना कार्यालय, पटना के उप निदेशक लौकिक पारख ने भी चर्चा में भाग लिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में भानु कुमार झा , क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी , केंद्रीय संचार ब्यूरो क्षेत्रीय कार्यालय , गया जी ने पैनल के सदस्यों का परिचय देते हुए चर्चा की शुरुआत की। लौकिक पारख ने सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके पश्चात प्रो. विनिता एस. सहाय ने लौकिक पारख को सम्मानित किया।

नशा मुक्ति के अभियान में मीडिया की सक्रिय भागीदारी जरूरी: लौकिक पारख

PIB पटना के उप निदेशक लौकिक पारख ने ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम की अवधारणा और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य पत्रकारों के साथ संवाद स्थापित करना तथा केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों और उपलब्धियों की जानकारी प्रभावी ढंग से उन तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषय पर जन-जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा शक्ति और नशा मुक्ति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। युवाओं को नशे से बचाकर ही उनकी ऊर्जा और क्षमता का सकारात्मक उपयोग राष्ट्र निर्माण में किया जा सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत: प्रो. विनिता एस. सहाय

आईआईएम बोधगया की निदेशक प्रो. विनिता एस. सहाय ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में पत्रकारों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि आज विश्व अनेक प्रकार के उथल-पुथल और चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में समाज को सही दिशा देने के लिए मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

उन्होंने बिहार की बदलती पहचान और राज्य में विकसित हो रहे शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका का उल्लेख किया। आईआईएम बोधगया में लगभग 1,600 आवासीय विद्यार्थियों की उपस्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान युवाओं के व्यवहार, उनकी आकांक्षाओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को करीब से समझता है।

उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को भविष्य की एक गंभीर चुनौती बताते हुए युवाओं के भावनात्मक स्वास्थ्य, पारिवारिक सहयोग और सकारात्मक वातावरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।

युवाओं की असीम ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाना जरूरी: विकास वैभव

विकास वैभव, आईजी, मगध रेंज ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब देश का युवा सही दिशा में आगे बढ़े और अपनी असीम ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करे। उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास, आत्मबोध और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने नशे के कुछ स्वरूपों के सामान्य हो जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं के बीच नशे को सामान्य या आकर्षक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत किए जाने की प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। इसके स्थान पर आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों से जुड़े संदेशों का व्यापक प्रसार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सामाजिक चुनौतियों और युवाओं को प्रभावित करने वाले नकारात्मक प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा तथ्यों के आधार पर उनका पर्दाफाश करने में जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि यदि युवा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना कठिन होगा। इसलिए युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना सरकार, समाज, परिवार और मीडिया की साझा जिम्मेदारी है।

नशे की रोकथाम के लिए समन्वित प्रयास आवश्यक

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक एस सफीक ओमर ने नशे की समस्या से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा के दौरान नशे के विभिन्न स्वरूपों, युवाओं पर इसके प्रभाव और भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को रेखांकित किया गया।

उन्होंने नशे की समस्या से निपटने के लिए तीन आयामी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई—नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर नियंत्रण, नशे की मांग में कमी तथा नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों का उपचार और पुनर्वास। नशा मुक्ति के प्रयासों में प्रशासनिक एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

तंबाकू की लत से मुक्ति और जमीनी स्तर पर जागरूकता पर जोर

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविकांत सिंह ने कहा कि नशे की समस्या किसी एक व्यक्ति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को प्रभावित करती है। इसके समाधान के लिए सभी की भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने तंबाकू के सेवन, विशेषकर खैनी जैसी आदतों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा गांव और प्रखंड स्तर पर खेल सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया, ताकि युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।

उन्होंने बताया कि तंबाकू छोड़ने में सहायता के लिए राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो हेल्पलाइन 1800-11-2356 के माध्यम से परामर्श और अनुवर्ती कॉल की सुविधा उपलब्ध है।

नशे से संबंधित रिपोर्टिंग में संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल जरूरी: डॉ. प्रेरणा कौल

यूनिसेफ की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेरणा कौल ने प्रस्तुति के माध्यम से नशे से संबंधित विषयों पर जिम्मेदार और संवेदनशील पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों के संबंध में रिपोर्टिंग करते समय उचित शब्दों का चयन किया जाना चाहिए, ताकि उनके प्रति कलंक और भेदभाव को बढ़ावा न मिले।

उन्होंने “Report to help, not to harm” के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्टिंग का उद्देश्य प्रभावित व्यक्तियों की सहायता करना, जागरूकता बढ़ाना और समाधान की दिशा में योगदान देना होना चाहिए।

रोकथाम के तीन स्तरों पर काम करने की जरूरत: प्रो. धर्मेंद्र

प्रो. धर्मेंद्र ने नशा मुक्ति अभियान में जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने रोकथाम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए समय रहते जागरूकता, उचित पहचान, परामर्श, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को नशे के आकर्षक दिखने वाले बाहरी पहलुओं के पीछे छिपे गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर युवाओं को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि नशा मुक्ति केवल प्रशासनिक कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए जागरूकता, रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक सहभागिता को साथ लेकर चलना होगा। पत्रकारों से अपील की गई कि वे नशे के दुष्परिणामों के प्रति समाज को जागरूक करने के साथ-साथ नशा मुक्ति से जुड़े सकारात्मक प्रयासों और उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएं।

‘वार्तालाप’ के माध्यम से PIB पटना ने पत्रकारों और विषय विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा देने तथा नशा मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में जन-जागरूकता को मजबूत करने का प्रयास किया।

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