पटना/दानापुर, 07 नवंबर 2026
दानापुर स्थित ‘स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निंग’ में दीपावली और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर भव्य अंतर-सदनीय रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और सांस्कृतिक निष्ठा का परिचय देते हुए भारतीय पर्व-त्योहारों की समृद्ध परंपरा को रंगों के माध्यम से सजीव कर दिया।

प्रतियोगिता को दो वर्गों – जूनियर एवं सीनियर वर्ग में आयोजित किया गया था। जूनियर वर्ग के नन्हे विद्यार्थियों ने पंचपर्व और छठ महापर्व के विभिन्न चरणों को दर्शाते हुए अलग-अलग खंडों में मनमोहक रंगोलियां बनाईं। इसमें धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, चित्रगुप्त पूजा के साथ-साथ छठ महापर्व के नहाय-खाय, खरना और संध्या अर्घ्य के महत्व को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया।

वहीं सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों ने पारंपरिक और आध्यात्मिक विषयों पर उत्कृष्ट कृतियां प्रस्तुत कीं। सीनियर सेक्शन द्वारा बनाई गई ‘लक्ष्मी-गणेश’, ‘लक्ष्मी जी के चरण चिह्न एवं मंगल कलश’, ‘भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य’ तथा मोर की कलात्मक आकृतियों के साथ ‘शुभ दीपावली’ की मंगलकामनाएं देती रंगोलियों ने उपस्थित शिक्षकों और अभिभावकों का मन मोह लिया।

रोबो की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यालय के अटल टिंकरिंग लैब (ATL) के छात्रों द्वारा प्रस्तुत छठ महापर्व की भव्य और वैज्ञानिक समझ से परिपूर्ण सजीव झांकी रही। इसमें रोबो द्वारा सूप लेकर चारों ओर घूमना एवं रोबो द्वारा सतत अर्घ्य देना अत्यंत मनमोहक था। इस झांकी के माध्यम से छात्रों ने छठ व्रत की कठिन तपस्या, पवित्रता, अनुष्ठान की संपूर्ण प्रक्रिया और सूर्योपासना के सामाजिक व वैज्ञानिक संदेश को बड़े ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर बोलते हुए ए.पी.सी.एल. के अध्यक्ष विजय प्रकाश ने कहा कि भारतीय परंपरा में सभी कौशल की पूजा की जाती है। धन अर्जन का कौशल, गौ पालन का कौशल, लेखन क्रिया का कौशल आदि को पूजने की परंपरा है। यह श्रम का सम्मान दिखाता है।

प्राचार्या डॉ. मृदुला प्रकाश ने बताया कि अरिपन केवल चित्र बनाना नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण शिक्षण विधा है।
भूतपूर्व भारतीय राजस्व सेवा के पदाधिकारी मिहिर रंजन ने बच्चों की सृजनशीलता एवं अरिपन कला की तारीफ की। वंदना रंजन ने भी बच्चों के अद्भुत प्रयास की सराहना की।
विद्यालय प्रबंधन व शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं की रचनात्मक सोच और सांस्कृतिक जुड़ाव की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
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