पटना 18 मार्च 2025
महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा एवं सम्मान विषय पर मंगलवार को बिहार पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में संवादात्मक सत्र ‘उड़ान’ का आयोजन किया गया। इस मौके पर बिहार पुलिस के महानिदेशक विनय कुमार, अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ, कमजोर वर्ग, सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक अमित जैन, गृह विभाग की एडीजी/विशेष सचिव केएस अनुपम, विशेष शाखा की डीआईजी हरप्रीत कौर तथा कमजोर वर्ग, सीआईडी के पुलिस अधीक्षक आमिर जावेद सहित कई वरीय अधिकारी सहित सैकड़ों महिला पुलिसकर्मी मौजूद थीं। ‘उड़ान’ कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद थी बिहार की बेटी बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू चंद्रा। इस अवसर सभी ने महिला सशक्तिकरण पर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद डीजीपी विनय कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि वर्ष 2007-08 में राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए साइकिल योजना शुरू हुई थी, उस वक्त थानों के द्वारा भी बच्चों को स्कूल जाने लिए प्रोत्साहित किया जाता था, पुलिस के इस सहयोग के कारण स्कूल में उपस्थिति बढ़ी थी। उस दौरान सुरक्षा की भावना के आते ही ग्रामीण परिवेश का पूरा माहौल बदल गया था। उसके बाद हर साल महिलाओं को लेकर सरकार द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में बिहार में कानून व्यवस्था अच्छे से कायम है। राज्य के हर जिले में एक महिला थाना कार्यरत है, ऐसा देश में किसी अन्य राज्य में नहीं है। हमारे यहां महिला पुलिस स्टेशन को महिला अधिकारी लीड कर रही हैं। पहले जहां महिलाएं थाने जाने से डरती थीं, अब महिला थाने खुलने से या महिला पुलिसकर्मी की भागीदारी से वे बेख़ौफ़ जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराती हैं। डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि समाज में फैली अश्लीलता के खिलाफ सबको मिलकर आगे आना होगा। तिलक जैसे कार्यक्रम में वल्गर गाने पर नाच हो रहा है, ऐसा इसलिए होता है कि उस क्षेत्र के लोग सुनना चाहते हैं। महिलाएं अगर घर से बाहर निकलकर ऐसे गाने बजाने पर रोक लगाने की बात करें, तो सब बंद हो जाएंगे। कहीं स्टेज पर डांस हो रहा है और कोई महिला के गाल पर नोट साट रहा है, ऐसी घटनाएं किसी भी रूप में क्षम्य नहीं है। ऐसी कृत्य पर तो महिलाओं को खुद ही आवाज उठानी चाहिए। अब घर के बूढ़े जब नाच देखेंगे तो उनके बच्चे बलात्कारी बनेंगे ही, इसलिए सबसे जरूरी है सबकी सोच को सही करना है। हाल के दिनों में मेरे पास कई महिलाओं के ऐसे कॉल आए हैं कि मुझे डांस या किसी कार्यक्रम के लिए बुलाया गया है, पर यहां असहज हूं, इसलिए मुझे यहां से निकाला जाए।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि आज के समय में पेरेंटिंग एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है। बच्चों के हाथ में मोबाइल आ गया है, पर यह गार्जियन का काम है कि इनपर नजर रखें। सरकार की तरफ से 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। 27 हजार महिला पुलिसकर्मी काम कर रही हैं और जल्द ही इसमें और जुड़ जाएंगी, इसके उपरांत महिला भागीदारी में हमारे आसपास भी कोई राज्य नहीं दिखेगा। पंचायती राज में 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण है, जो बिहार के लिए वाकई बड़ी बात है। आज हर जिले में महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारी की अच्छी संख्या है, जो आज से कुछ साल पहले तक नहीं थी। हमारे डायल 112 व अन्य हेल्पलाइन नंबर पर भी बेहतर रेस्पॉन्स मिल रहा है। लास्ट ईयर साढ़े पांच सौ (550) करोड़ रुपए सिर्फ महिला थाना के लिए ही हमने सरकार से लिया है, ताकि महिला थाने को और संबल बनाया जा सके। पुलिस के साथ मारपीट व हमले जैसी घटनाएं बढ़ी हैं, पर इसका मतलब ये नहीं कि पुलिस काम करने से डर जाए, हमें ऐसी घटनाओं को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। पॉक्सो एक्ट लागू करने के मामले में भी बिहार अव्वल है।