पटना, 7 जुलाई 2026

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने लिम्फेटिक फाइलेरिया (एलएफ/हाथीपांव) उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2026 में पहली बार राज्य के अररिया, मधेपुरा, सुपौल एवं किशनगंज जिलों ने ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) के सभी पात्रता मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके साथ ही ये जिले अब सामूहिक दवा वितरण अभियान से आगे बढ़ते हुए फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के निगरानी चरण में प्रवेश करेंगे।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की संयुक्त राष्ट्र (UN) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सराहना की गई है। यह सम्मान बिहार की सुदृढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रभावी रणनीतियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा लाखों स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पित प्रयासों की वैश्विक मान्यता है। साथ ही यह उपलब्धि भारत को वर्ष 2027 तक लिम्फेटिक फाइलेरिया मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में बिहार के महत्वपूर्ण योगदान को भी रेखांकित करती है।

ज्ञात हो कि भारत को वर्ष 2027 तक लिम्फेटिक फाईलेरिया मुक्त बनाने के लिए एम.डी.ए. अभियान 2026 अर्थात् सामूहिक दवा सेवन अभियान के तहत् एक करोड़ लोगों को फाईलेरिया रोधी दवा खिलाने का राज्य स्तरीय लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य को पार करते हुए राज्य ने उक्त अभियान के दौरान दिनांक 11 फरवरी, 2026 को मात्र एक दिन में एक करोड़ पैंतीस लाख लोगों को फाईलेरिया रोधी दवा का सेवन कराकर ऐतिहासिक मिसाल कायम की, जो लक्ष्य से 35 प्रतिशत अधिक है।

माननीय स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम की सफलता नहीं, बल्कि बिहार सरकार की जनकेंद्रित नीतियों, मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली तथा जनभागीदारी आधारित कार्यशैली का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट (DOT) पद्धति को प्रभावी ढंग से लागू किया, जिसके अंतर्गत केवल दवाओं का वितरण ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति में उनका सेवन भी सुनिश्चित कराया गया। इस व्यवस्था ने उपचार कवरेज और कार्यक्र म की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि की, जिसके सकारात्मक परिणाम आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस सफलता का वास्तविक श्रेय राज्य के लाखों आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों, विकास सहयोगी संस्थाओं तथा जागरूक नागरिकों को जाता है, जिन्होंने इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया। पिछले दो दशकों में उनके समर्पण, अनुशासन एवं सतत प्रयासों ने बिहार को यह गौरवपूर्ण उपलब्धि दिलाई है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य के 11 जिलों—अररिया, अरवल, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, सुपौल, गया, कैमूर, नालंदा, जहानाबाद एवं पटना के कुल 89 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स जिनमें शहरी एवं ग्रामीण प्रखंड शामिल हैं, इनमें प्रभावी सर्वजन दवा सेवन (MDA) अभियान के परिणामस्वरूप फाइलेरिया संक्रमण की दर 1 प्रतिशत से कम दर्ज की गई है।

हाल ही में राज्य के चार जिलों—अररिया, किशनगंज, मधेपुरा एवं सुपौल के कुल 37 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स में ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे-1 का संचालन किया गया। इनमें से 35 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स ने पहली बार सभी निर्धारित मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इनमें अररिया एवं मधेपुरा जिले पूर्णतः TAS-1 (ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे- 1) सफल घोषित होने के बाद अब TAS-2 (ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे- 2) के लिए चयनित हो गए हैं, जो फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वहीं सुपौल के सभी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स भी TAS-1 सफलतापूर्वक पूर्ण कर निगरानी चरण में प्रवेश कर रहे हैं।

जुलाई माह में राज्य के 25 जिलों के 107 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स में प्री-ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (Pre-TAS) गतिविधि संचालित की जाएगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक प्रखंड में तीन निर्धारित स्थलों पर रात्रिकालीन रक्त नमूना संग्रह किया जाएगा। इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि संबंधित इम्प्लीमेंटेशन यूनिट में फाइलेरिया संक्रमण की दर एक प्रतिशत से कम है अथवा एक प्रतिशत से अधिक।

स्वास्थ्य मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में प्राप्त यह ऐतिहासिक सफलता बिहार के लिए गर्व का विषय होने के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध रहेगा।

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