पटना 03 सितम्बर 2026

हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की पहचान, संस्कृति, संस्कार और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। हिन्दी के प्रति जागरूकता और इसके व्यापक प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज IIT पटना के बिहटा स्थित परिसर में हिन्दी पखवाड़ा-2026 का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी जी ने किया।

कार्यक्रम में IIT पटना के निदेशक प्रो. टी.एन. सिंह जी ने शिक्षा मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर राज्यभाषा समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रो. प्रीतम कुमार जी ने हिन्दी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और जीवन-शैली का अभिन्न हिस्सा है। यह हमारे स्व, संस्कार और संस्कृति को अभिव्यक्ति देती है तथा रिश्तों और सामाजिक व्यवहार के आत्मीय पक्ष को सहजता से सामने लाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने दैनिक जीवन में कम-से-कम 5 प्रतिशत समय हिन्दी के लिए अवश्य दें और हिन्दी में पढ़ने, लिखने तथा रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि यदि हमें ज्ञान का सागर बनना है तो हिन्दी का ज्ञान सभी के लिए आवश्यक है।

शिक्षा मंत्री ने “हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दुस्तान हमारा” का नारा दोहराते हुए कहा कि हिन्दी हिंदुस्तान की सबसे प्रिय भाषाओं में से एक है और इसकी सबसे बड़ी शक्ति इसकी आत्मीयता है। उन्होंने कहा कि ‘माँ’ शब्द हिन्दी में जिस भावनात्मक प्रभाव और अपनत्व के साथ व्यक्त होता है, उसकी अनुभूति अद्वितीय है। हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है और हिन्दी इस सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे ले जाने का सशक्त माध्यम है।

उन्होंने आधुनिक भारत में हिन्दी की वैश्विक उपस्थिति का उल्लेख करते हुए स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो संबोधन के “बहनों और भाइयों” जैसे आत्मीय संबोधन को भारतीय संस्कृति की विशेषता बताया। साथ ही, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में दिए गए ऐतिहासिक संबोधन का स्मरण करते हुए कहा कि हिन्दी ने वैश्विक मंच पर भी भारत की पहचान को मजबूती से स्थापित किया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे हिन्दी को केवल एक विषय के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपने दैनिक व्यवहार, अध्ययन और रचनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि हिन्दी को समृद्ध करना केवल भाषा का संरक्षण नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम के अंत में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने हिन्दी में पठन, लेखन एवं रचनात्मक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया तथा सभी विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को हिन्दी के प्रति निरंतर योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

हिन्दी पखवाड़ा-2026 के माध्यम से विद्यार्थियों में हिन्दी के प्रति गौरव, प्रयोग और रचनात्मकता की भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

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