नई दिल्ली, 03 नवंबर 2026
जल निकायों के पुनरुद्धार को अवसंरचना विकास के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार ने आज बिहार में चिह्नित नदियों तथा अन्य जल निकायों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने और राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण परियोजनाओं में गाद का उपयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए।

‘नदी संजीवनी’ के रूप में परिकल्पित इस पहल का उद्देश्य नदियों और जल निकायों की जलधारण क्षमता को बहाल करना, बाढ़ प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना, कृषि भूमि का संरक्षण करना तथा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण के लिए एक टिकाऊ स्रोत उपलब्ध कराना है। यह पहल अवसंरचना के विस्तार को गति प्रदान करने के साथ-साथ जल प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नदियों में बड़ी मात्रा में गाद जमा होने से उनकी जलधारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके कारण बाढ़, कृषि भूमि और संपत्ति की क्षति जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। बिहार को बार-बार बाढ़ और जल संकट की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से नेपाल से निकलने वाली नदियां भारी मात्रा में पानी और गाद लेकर राज्य में प्रवेश करती हैं, जिससे ये समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से गाद की निकासी से जल प्रवाह और जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा, जल निकायों का पुनरुद्धार होगा तथा राजमार्ग निर्माण के लिए उपयुक्त सामग्री उपलब्ध होगी।

नितिन गडकरी ने कहा कि इस पहल से पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यवस्था विकसित होगी, जिसमें नदियों का पुनरुद्धार अवसंरचना विकास को सहयोग प्रदान करेगा, वहीं निकाली गई गाद के उपयोग से कृषि योग्य मिट्टी और अन्य सामग्री पर निर्भरता कम होगी। इससे उपजाऊ कृषि भूमि का संरक्षण करने, निर्माण लागत कम करने और राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस पहल को बिहार सरकार के समन्वय से उचित तकनीकी आकलन और आवश्यक सुरक्षा उपायों के साथ लागू किया जाएगा। श्री गडकरी ने इस पहल पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे अन्य राज्यों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिससे सतत अवसंरचना विकास और बेहतर जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में बार-बार बाढ़ के कारण किसानों, कृषि भूमि, आजीविका और अवसंरचना को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने नदियों और जल निकायों के वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उनमें जमा गाद के कारण जलधारण क्षमता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को दूर किया जा सके।
सम्राट चौधरी ने कहा कि जल निकायों के पुनरुद्धार और उनमें जमा गाद के प्रबंधन के लिए एक सुव्यवस्थित रूपरेखा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026’ तैयार की गई है। यह नीति बाढ़ के बाद कृषि भूमि पर जमा रेत और गाद को हटाने की सुविधा भी प्रदान करती है, जिससे प्रभावित किसानों को राहत मिलेगी।
श्री चौधरी ने समझौता ज्ञापन का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल बाढ़ प्रबंधन, कृषि विकास और अवसंरचना विस्तार की दिशा में बिहार के प्रयासों को और सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि जल निकायों के पुनरुद्धार से उनकी जलधारण क्षमता में सुधार होगा, सिंचाई और पेयजल के लिए जल की उपलब्धता बढ़ेगी, भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा तथा बाढ़ से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस पहल के कार्यान्वयन और प्रस्तावों के समयबद्ध निपटान में राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गाद के उपयोग की व्यापक संभावनाएं
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में निकाली गई गाद के उपयोग की व्यापक संभावनाओं की पहचान की है। इस पहल के तहत 16 निर्माणाधीन परियोजनाओं में 243 लाख घन मीटर उपयुक्त गाद का उपयोग किया जाएगा, जबकि 27 भावी परियोजनाओं में अनुमानित 835 लाख घन मीटर गाद के उपयोग का प्रस्ताव है। तकनीकी उपयुक्तता और आवश्यक स्वीकृतियों के अंतर्गत गाद का उपयोग किया जाएगा।
वर्तमान में बिहार में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की लगभग 1,561 किलोमीटर लंबाई की 39 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनमें अनुमानित 58,340 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लगभग 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 अन्य परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें अनुमानित 1,85,200 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
निकाली गई गाद की उपलब्धता से इन परियोजनाओं की निर्माण सामग्री की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा पूरा होने की उम्मीद है। इससे निर्माण लागत कम करने और राजमार्ग निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।

सुरक्षा उपायों और निगरानी के साथ वैज्ञानिक कार्यान्वयन
इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 तथा लागू पर्यावरणीय और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और बिहार सरकार के बीच समन्वित एवं समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए एक संस्थागत व्यवस्था स्थापित की गई है।
बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। प्रस्तावों की जांच, स्वीकृतियां प्रदान करने में सुविधा, कार्यान्वयन की निगरानी और परिचालन संबंधी समस्याओं का समाधान राज्य स्तरीय समन्वय समिति द्वारा किया जाएगा।
चिह्नित जल निकायों का विस्तृत तकनीकी आकलन करने के बाद वैज्ञानिक तरीकों से गाद निकासी का कार्य किया जाएगा। गाद निकालने की अनुमति केवल स्वीकृत स्थलों पर और निर्धारित तकनीकी सीमाओं के भीतर ही दी जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गाद निकालने से नदी इको-सिस्टम, नदी तटों, तटबंधों, पुलों और अन्य संरचनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में निकाली गई गाद की उपयुक्तता का निर्धारण सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लागू विनिर्देशों तथा भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) की संबंधित संहिताओं के अनुरूप उचित परीक्षण के माध्यम से किया जाएगा। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त मापन, डिजिटल अभिलेखों का रखरखाव, नियमित निगरानी तथा निकाली गई, परिवहन की गई और उपयोग की गई गाद की मात्रा का समय-समय पर मिलान किया जाएगा।
बिहार में संपर्क सुविधा का विस्तार
भारत सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना का उल्लेखनीय विस्तार किया है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क वर्ष 2014 के 4,615 किलोमीटर से बढ़कर वर्तमान में लगभग 6,500 किलोमीटर हो गया है। क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ बनाने तथा लोगों और वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए वर्ष 2014 से बिहार की प्रमुख नदियों पर लगभग 29 नए पुलों का निर्माण कार्य भी शुरू किया गया है।

यह समझौता ज्ञापन संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से नदी पुनरुद्धार, बाढ़ प्रबंधन, कृषि भूमि संरक्षण और अवसंरचना विकास को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निकाली गई गाद को उपयोगी निर्माण सामग्री में परिवर्तित करके यह पहल कृषि भूमि के संरक्षण, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की दक्षता बढ़ाने और जल निकायों के पुनरुद्धार में सहायक होगी।
‘नदी संजीवनी’ एक ऐसे सतत विकास मॉडल का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें नदी पुनरुद्धार और अवसंरचना निर्माण एक-दूसरे के पूरक बनेंगे। इससे बेहतर संपर्क सुविधाओं से युक्त समृद्ध बिहार के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, महानिदेशक सुदीप चौधरी, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार, बिहार सरकार के सचिव पंकज पाल और अतुल कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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