पटना 13 सितम्बर 2024

दादी मंदिर में मित्तल परिवार द्वारा सात दिवसीय भागवत कथा आयोजन के छठे दिन की कथा प्रारम्भ हुईं। मुख्य यजमान सुशील मित्तल एवं तारा देवी मित्तल ने व्यास गद्दी एवं व्यास गद्दी पर बैठे आचार्य चंद्रभूषण मिश्र की पूजा की। मौके पर मित्तल परिवार के सुंदर लाल एवं अलका मित्तल, पंकज मित्तल, कुसुम मित्तल, प्रमोद मित्तल एवं नीलम मित्तल, अमित एवं जया मित्तल ने भी इसमें भाग लिया।

दोपहर बाद आज छठे दिन की भागवत कथा का प्रारम्भ करते हुए शास्त्रोपासक आचार्य श्री डॉ चंद्रभूषणजी मिश्र ने बताया कि भागवत के दशम स्तम्भ में सम्पूर्ण श्रीकृष्ण चरित्र का क्रमवद्ध वर्णन किया गया है. पूर्ण ब्रह्म भगवान् श्रीकृष्ण अपनी भगवत्ता को छिपा कर जन समाज ही नहीं प्रकृति के सभी अवयव पहाड़, पक्षी, वृक्ष, जल सबके साथ इतने घुलमिल जाते हैं कि सबके आदर्श बन जाते हैं. यही कारण है कि श्रीकृष्ण को जगत गुरु के रूप में स्वीकार किया जाता है .

आचार्यश्री ने बताया कि श्रीकृष्ण की मुख्य पत्नी है रुक्मणी, इसके अलावे द्वारका के आठ छोटे छोटे राज्यों के आठ कन्याओं के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर अपनी सामरिक व्यवस्था मजबूत करते हैं. श्री कृष्ण चरित्र की चर्चा में दो बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है. एक तो यह कि श्रीकृष्ण काल में ब्रज में निवास करने वाले हजारों जन्मो से तपस्या करके ब्रह्मा से ब्रज में जन्म लेने का आशीर्वाद मांगा था ताकि श्रीकृष्ण लीला का अंग बन सके. दूसरी बात यह कि बड़े घर का लड़का छोटे घरों के लड़कों से दूरी बनाकर रखता है. नन्द बाबा ब्रज प्रदेश के मुखिया भी हैं. उनके पास नौ लाख गायें हैं.

द्वापर में गाय को ही मुख्य संपत्ति माना जाता है. इस दृष्टि से भी नन्द बाबा की पूरी प्रतिष्ठा थी. श्रीकृष्ण के साथ गाँव के उपेक्षित बच्चे भी कृष्ण से मित्रता करके यशोदा मैया के आँगन में खेलने आते हैं और नन्द – यशोदा सबको श्रीकृष्ण की तरह ही प्यार दुलार करते हैं. सुदामा श्रीकृष्ण का गरीब बाल सखा है. श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बनने के बाद भी सुदामा का मित्र की तरह ही स्वागत एवं आदर करते हैं. आचार्यश्री ने बताया कि भागवत में लिखा है कि जब श्रीकृष्ण को अपने घर चलने का निमंत्रण देने के लिए समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति या कोई दीन हीन व्यक्ति जाता है तो भगवान् श्रीकृष्ण साधारण व्यक्ति के घर जाकर साधारण चटाई या जमीन पर बैठ कर उससे मांग मांग कर खाते पीते हैं.

आचार्य श्री ने बताया की भगवान श्रीकृष्ण रसों के बादशाह हैं – “रसो वै सः” . आनंद प्राप्त करने के जितने तरीके हैं, श्रीकृष्ण सबके सम्मिलित रूप हैं. महारास द्वारा वही आनन्द दर्शकों को भी मिलता है और उसमे भाग लेने वालों को भी . एम पी जैन ने बताया कि आज के कथा सुनने के लिए दादी मंदिर में मुख्य संस्थापक अमर अग्रवाल, बिनोद एवं सुनीता मित्तल, साजन मित्तल, सुशील मित्तल सहित सैकड़ों की संख्या में भक्तगण उपस्थित थे।

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