पटना, 09 अक्टूबर, 2024

नागाबाबा ठाकुरवाड़ी में 10 दिवसीय रामलीला के मंचन के सातवें दिन कार्यक्रम की शुरुआत श्रीराम स्तुति ‘श्रीराम चंद्र कृपालु भजन के साथ हुई।रामलीला के मंचन के सातवें दिन रामलीला महोत्सव का उद्घाटन, दशहरा कमिटी के अध्यक्ष अरुण कुमार, चेयरमैन कमल नोपनी, संयोजक मुकेश नंदन, सह संयोजक राकेश कुमार एवं अन्य ने किया। इसके बाद आरती हुई।
आज के रामलीला मंचन में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का जीवंत चित्रण किया गया।

नागाबाबा ठाकुरवाड़ी में 10 दिवसीय रामलीला के मंचन के सातवें दिन प्रभु श्री राम मंत्री सुमंत को वापस अयोध्या भेजते हैं और केवट से नदी पार कराने का कहते हैं ,केवट भी उनसे भवसागर पार कराने का वचन लेता है। भगवान राम ,लक्ष्मण और सीता से मंत्री सुमंत वापस अयोध्या चलने का अनुरोध करते हुए कहते हैं कि महाराज दशरथ ने उनसे कहा था चौदह वर्ष कि जगह चौदह दिन के वनवास के बाद आपको अपने साथ अयोध्या वापस लेकर आ जाएँ। तब भगवान राम उन्हें मना करते हुए कहते हैं कि ऐसा करना उचित नहीं होगा। वे पिता कि आज्ञा का पालन करेंगे और चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात् ही अयोध्या वापस जायेंगे।

उनकी बात सुनकर मंत्री सुमंत दुखी हो जाते है। तब प्रभु श्रीराम गंगा नदी पर कराने के लिए केवट को बुलाने को कहते हैं। केवट उनके पास आता है और कहता है कि आपके चरण रज से शिलारूपी अहिल्या नारी बन गई। अतः वह भयभीत है ,उसे चिंता सता रही है कि उसकी नौका कहीं नारी न बन जाए। अगर ऐसा हुआ तो उसके परिवार का पालन पोषण बंद हो जाएगा। क्योकि यही नौका उसकी जीविका का एकमात्र साधन है। ऐसे में जब तक वह पैर पखार न लेगा तब तक वह प्रभु श्री राम को अपनी नाव पर नहीं चढ़ाएगा। इस पर भगवान श्रीराम ने केवट को पैर पखारने के लिए कहा। तब केवट ने श्री राम का पैर पखार कर उन्हें अपनी नाव में चढ़ाया और गंगा पार करा दिया । गंगा पार उतरने के बाद श्री राम ने जब केवट को मजदूरी देना चाहते हैं तो केवट ने यह कहते हुए मना कर देते हैं कि आज आप मेरे घाट पर आए तो मैंने आपको पार कराया है , जब मैं आपके घाट आऊं तो आप भी मुझे भवसागर से पार करा देना। केवट की यह बात सुनकर प्रभु राम उसे आशीर्वाद देते हैं और सीता तथा लक्ष्मण सहित आगे बढ़ जाते हैं। इधर दुखी मन से मंत्री सुमंत अयोध्या लौट जाते हैं और महाराज दशरथ को बताते हैं कि उन्होंने प्रभु राम, जानकी और लक्ष्मण को वापस लाने का बहुत प्रयत्न किया, किन्तु वे नहीं आए। यह सुनकर दशरथ विलाप करते हुए प्राण त्याग देते हैं। जिसके बाद अयोध्या में शोक की लहर दौड़ जाती है। इसके बाद अन्य घटनाक्रमों को बहुत हीं सुंदर ढंग से दिखया गया।

एम पी जैन ने बताया कि आज के आयोजन में सह संयोजक राकेश कुमार, रामलीला संयोजक श्री प्रिंस कुमार राजू, रामलीला सह संयोजक श्री आशु गुप्ता, कोषाध्यक्ष पवन कुमार, सुजय सौरभ, सुषमा साहू, , सुशील बजाज, प्रो० नवल किशोर, मनीष कुमार, संजय राय, महासचिव राकेशचंद्र मल्होत्रा,अरुण कुमार गुप्ता,राजेश बजाज, संजय वर्णवाल, आर्य नन्दन, धर्मराज केशरी, शम्भु बाबा, प्रेम कुमार , अमित शिवम्…सहित सैकडो की संख्या रामभक्त उपस्थित रहे।

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