पटना 14 अगस्त 2026

स्टैच्यूट्स फॉर अपॉइंटमेंट्स ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स 2026 से पीएचडी अभ्यर्थियों में व्याप्त असंतोष और 11 दिनों से चल रहे आमरण अनशन पर बिहार कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने सरकार की कड़ी निंदा की ।

उच्च शिक्षा मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि गर्दनीबाग स्थित धरनास्थल पर राज्य के नेट जेआरएफ पीएचडी उत्तीर्ण शोधार्थी पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन पर हैं लेकिन राज्य सरकार का एक अदद प्रतिनिधि उनसे मिलकर कोई सार्थक बातचीत नहीं कर रहा है। वहीं राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री को राज्य में घूम घूम कर कार्यक्रम करने का फुर्सत है लेकिन उनके ही जिले के आमरण अनशन कर रहे छात्रों से मिलकर उनकी बातों को सुनने का समय नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा कि धरनारत पीएचडी अभ्यर्थियों के समर्थन में हमारे प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने जाकर उनकी बातों को सुना और सक्षम अधिकारियों तक बातें भी पहुंचाई लेकिन बावजूद इसके इन छात्रों को देखने सुनने वाला सरकार की ओर से कोई नहीं है। उनकी छ: मांगे पूरी तरीके से जायज है और सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 उच्च शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरीके से राज्य में धराशायी कर देगी। इस नियमावली से सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में भाई भतीजावाद और अराजकता बढ़ेगी।

आमरण अनशन पर बैठे कुमुद पटेल, अभिषेक कुमार और विकू सिंह के गिरते स्वास्थ्य से हम सब चिंतित हैं लेकिन सरकार को युवाओं की आवाज दरकिनार कर चलने की आदत हो गई है।जब यही छात्र सड़कों पर होंगे तो इन्हें एके 47 की गोलियों और पैलेट गन से गोलियां दागी जाती है। राज्य सरकार को चाहिए कि अविलंब उच्च शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम बनाकर उनकी मांग को सुना जाएं और उन्हें दुरुस्त करने की ओर कदम उठाया जाएं। बिहार के सबसे उच्च शिक्षित छात्रों के लिए सरकार के मन में कोई संवेदनाएं नहीं है।

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का भगवाकरण करने की फिराक में काम कर रही यह सरकार ऐसे नियमावली के माध्यम से अपने पसंद के लोगों की बहाली करने के लिए राष्ट्रीय मानकों को दरकिनार कर भर्ती प्रक्रिया को संचालित करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी सरकार की इस अदूरदर्शी और छलावापूर्ण नीति की तीव्र भर्त्सना करती है।

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