पटना, 31 अक्टूबर 2026
आज बिहार विद्यापीठ:देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय कुर्जी पटना में अंग्रेजी भाषा शिक्षण-अधिगम सामग्री की एक आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी का आयोजन अंग्रेजी भाषा के सहायक प्रोफेसर, मंजरी चौधरी के संयोजन एवं मार्गदर्शन में तथा सभी सहायक प्रोफेसरों के अकादमिक सहयोग से महाविद्यालय के बी.एड. एवं डी.एल.एड. के प्रशिक्षुओं द्वारा किया गया।

इस अवसर पर प्रदर्शनी के अवलोकन के उपरांत बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष , विजय प्रकाश ,भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवा निवृत्त वरिष्ठ पदाधिकारी ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षण-अधिगम सहायक सामग्री शिक्षा प्रक्रिया को अत्यंत प्रभावी, सरल एवं रुचिकर बनाती है। इसके प्रयोग से विद्यार्थी विषयवस्तु को आसानी से समझ पाते हैं तथा उनकी सीखने में सक्रिय भागीदारी भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के साथ-साथ नवीन तकनीकों एवं रचनात्मक शिक्षण विधियों का उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। एक कुशल शिक्षक वही है, जो विद्यार्थियों की आवश्यकताओं एवं रुचियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण को प्रभावशाली बना सके। उन्होंने प्रशिक्षुओं को भविष्य में भी इस प्रकार के नवाचारों को अपने शिक्षण कार्य का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि रचनात्मक शिक्षण सामग्री और नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियाँ ही शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस अवसर पर निदेशक शिक्षा, संस्कृति एवं संग्रहालय डॉ. मृदुला प्रकाश ने सभी प्रशिक्षुओं के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ प्रशिक्षुओं की रचनात्मक क्षमता, आत्मविश्वास एवं व्यावहारिक शिक्षण कौशल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में निरंतर सीखने, नए प्रयोग करने और आगे बढ़ने की भावना बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर भविष्य में एक योग्य एवं प्रभावशाली शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम वर्मा ने भी प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी प्रशिक्षुओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सृजनात्मकता एवं सीखने की रुचि विकसित करने वाला मार्गदर्शक भी होता है। इसके लिए शिक्षकों को अपने व्यक्तित्व, संप्रेषण कौशल एवं शिक्षण दक्षताओं का निरंतर विकास करना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षुओं को एक आदर्श एवं कुशल शिक्षक के रूप में स्वयं को विकसित करने तथा शिक्षण में नवीन प्रयोगों को अपनाने की सलाह दी।

इस कार्यक्रम में बिहार विद्यापीठ के संयुक्त सचिव अवधेश के नारायण, ए.आई.सी. के सी.ओ.ओ. प्रमोद कर्ण, सहित महाविद्यालय के सभी सहायक प्रोफेसर एवं सभी अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा प्रशिक्षुओं द्वारा निर्मित शिक्षण सामग्रियों की उपयोगिता, रचनात्मकता एवं प्रस्तुतीकरण की सराहना की।इस अवसर पर शिक्षकेत्तर कर्मचारीगण की सक्रिय भागीदारी रही।
इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों को अंग्रेजी भाषा के शिक्षण को अधिक सरल, सहज, प्रभावशाली, रुचिकर एवं गतिविधि आधारित बनाने के लिए विभिन्न शिक्षण सहायक सामग्रियों के निर्माण एवं उपयोग के प्रति प्रोत्साहित करना था।
प्रदर्शनी में महाविद्यालय के बी.एड. एवं डी.एल.एड. के प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षुओं ने अपनी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता एवं शैक्षणिक कौशल का परिचय देते हुए अंग्रेजी भाषा शिक्षण के लिए विभिन्न प्रकार की शिक्षण-अधिगम सामग्रियाँ तैयार कर प्रदर्शित कीं। इन सामग्रियों के माध्यम से अंग्रेजी वर्णमाला, शब्दावली, व्याकरण, वाक्य संरचना, उच्चारण, भाषा कौशल तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों को सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। प्रदर्शित सामग्रियों में चार्ट, मॉडल, फ्लैश कार्ड, वर्कशीट, भाषा संबंधी गतिविधियाँ एवं अन्य नवाचारपूर्ण शिक्षण उपकरण विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

इस प्रदर्शनी ने प्रशिक्षुओं को अपनी सैद्धांतिक समझ को व्यावहारिक रूप देने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। साथ ही, उन्हें यह अनुभव करने का अवसर मिला कि किस प्रकार उपयुक्त शिक्षण सामग्री के माध्यम से जटिल विषयवस्तु को भी सरल, बोधगम्य एवं आनंददायक बनाया जा सकता है। इस प्रकार की गतिविधियाँ भावी शिक्षकों में आत्मविश्वास, सहयोग की भावना, सृजनात्मक चिंतन एवं कक्षा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण गुणों के विकास में सहायक सिद्ध होती हैं।
महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने प्रशिक्षुओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यह प्रदर्शनी भावी शिक्षकों के लिए एक प्रेरणादायक एवं अनुभवात्मक शैक्षणिक गतिविधि सिद्ध हुई।
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