मुंबई / नई दिल्ली,20 मई, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों की बचत और विवेकपूर्ण उपयोग के संदेश को आगे बढ़ाते हुए, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने ‘विश्व मधुमक्खी दिवस-2026’ वर्चुअल माध्यम से मनाया। इस वर्ष की थीम — “Bee Together for People and the Planet” के अनुरूप देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

नई दिल्ली स्थित केवीआईसी के गांधी दर्शन कार्यालय से अध्यक्ष मनोज कुमार ने देशभर के केवीआईसी कार्यालयों, मधुमक्खी पालकों, लाभार्थियों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को ऑनलाइन संबोधित किया। सीबीआरटीआई, पुणे में ‘हनी प्रदर्शनी’ का शुभारंभ भी वर्चुअल माध्यम से किया गया।
मुख्य बिंदु:
- हनी मिशन की उपलब्धियां: वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक केवीआईसी ने देशभर में 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनियों का वितरण किया, जिससे 24,269 मीट्रिक टन शहद उत्पादन को बढ़ावा मिला।
- उत्पादन व निर्यात: वर्ष 2025-26 में शहद उत्पादन 5,512 मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। केवीआईसी से जुड़े मधुमक्खी पालकों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 31 करोड़ रुपये मूल्य के शहद का निर्यात किया।
- वैश्विक पहुंच: भारतीय शहद अमेरिका, कनाडा, यूएई, इजराइल, सऊदी अरब, ओमान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कतर और कोरिया रिपब्लिक सहित कई देशों में निर्यात किया जा रहा है।
- प्रधानमंत्री का विजन: अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2016 में गुजरात के बनासकांठा से ‘स्वीट क्रांति’ का आह्वान किया था — ‘जहां श्वेत क्रांति हुई है, वहां अब स्वीट क्रांति भी होगी।’ यह केवल नारा नहीं, बल्कि गांव, किसान और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का व्यापक दृष्टिकोण था।”

अपील: अध्यक्ष केवीआईसी ने मधुमक्खी पालकों से आह्वान किया कि मधुमक्खी पालन को केवल शहद उत्पादन तक सीमित न समझें। यह प्रकृति संरक्षण, खेती की उन्नति और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त माध्यम है। सभी से विश्व मधुमक्खी दिवस पर मधुमक्खियों के संरक्षण और ‘स्वीट क्रांति’ को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से जुड़े प्रतिभागियों ने डिजिटल माध्यम से सफलता की कहानियां साझा कीं। यह आयोजन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में केवीआईसी के सतत प्रयासों का सशक्त उदाहरण है।
![]()
