पटना 23 जुलाई 2026
रामकृष्ण द्वारिका महाविद्यालय, पटना में गुरुवार को स्नातक प्रथम सेमेस्टर, सत्र 2026-30 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ (इंडक्शन) समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 तथा उच्च शिक्षा के उद्देश्यों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत संबोधन के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सीता सिन्हा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें अनुशासित, मूल्यपरक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व से अवगत कराया। संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शैलजा सिन्हा ने मंच संचालन के दौरान विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, समयपालन, नैतिक आचरण तथा महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। भावना सिंह, विभागाध्यक्ष,जंतुविज्ञान ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

समारोह के दौरान विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों को अपने-अपने विषयों का परिचय दिया तथा पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, पुस्तकालय, छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), एन.सी.सी, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, कैरियर मार्गदर्शन एवं रोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी प्रदान की जिनमें प्रो.जगन्नाथ प्रसाद, डॉ रवि रंजन प्रसाद, डॉ अमर कुमार, डॉ सरिता कुमारी, डॉ निधि सिन्हा, स्मिता वैदेही, डॉ रंजन कुमार, डॉ आशीष कुमार, डॉ सुबोध चौधरी, डॉ सुशील कुमार, डॉ हरजीत कुमार, डॉ बबलू कुमार,डॉ सुनीता कुमारी, डॉ जया दीक्षित, डॉ मुकेश कुमार राय, डॉ कृष्ण कांत राय, डॉ नवीन कुमार आदि शिक्षकों ने छात्र –छात्राओं को संबोधित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को महाविद्यालय की विभिन्न समितियों (सेल्स) एवं सुविधाओं से भी अवगत कराया गया।

महाविद्यालय के वर्तमान छात्र/छात्रा तनिष्का एवं साकेत ने भी इस महाविद्यालय के साथ का अपना अनुभव साझा किया।
नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा शिक्षकों के साथ संवाद स्थापित कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार किया तथा उन्हें महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण से आत्मीय रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।
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