नई दिल्ली,08 अगस्त 2026

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने पहली बार 18 मीट्रिक टन जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना की वाणिज्यिक समुद्री खेप को बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र, बिहटा, बिहार से ऑस्ट्रेलिया के लिए निर्यात कराने में सुविधा प्रदान की। दरभंगा जिले के मखाना उत्पादकों से प्राप्त इस खेप से बिहार के प्रमुख जीआई उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति मजबूत होने के साथ-साथ निर्यात-आधारित बाजार पहुंच के माध्यम से किसानों के लिए आय के बेहतर अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

इस निर्यात खेप को बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रवाना किया। इस अवसर पर बिहार सरकार के उद्यान निदेशक, एपीडा के अधिकारी, निर्यातक के प्रतिनिधि, लॉजिस्टिक्स साझेदार और क्षेत्र के प्रगतिशील मखाना उत्पादक उपस्थित थे।

इस पहल ने किसानों को प्रचलित बाजार दरों की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ  प्राप्त करने में सक्षम बनाया है, जो निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं और प्रत्यक्ष बाजार संपर्क के लाभों को रेखांकित करता है। इस निर्यात से जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति मजबूत होने, बिहार के मखाना क्षेत्र के लिए सतत निर्यात अवसर सृजित होने और किसानों की आय बढ़ाने में योगदान मिलने की उम्मीद है।

इस खेप का निर्यात M/s एनआईएडी ग्रीन द्वारा किया गया, जिसमें M/s जित्बन सप्लाई चेन  प्राइवेट लिमिटेड ने लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान की, जो एपीडा के भारती (निर्यात नवाचार के लिए भारत का एग्रीटेक, लचीलापन, उन्नति और इनक्यूबेशन हब) के तहत समर्थित एक स्टार्टअप है। प्रीमियम-गुणवत्ता वाले कच्चे जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना से युक्त इस खेप को सीधे दरभंगा जिले के किसानों से प्राप्त किया गया और बीआईएडीए औद्योगिक क्षेत्र, बिहटा, बिहार में पैक किया गया।

इस अवसर पर बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना बिहार की पहचान है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार-आधारित निर्यातकों की अधिक भागीदारी से किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया और कहा कि बिहार सरकार उत्पादकों, प्रसंस्करण कर्ताओं और निर्यातकों को समर्थन देकर मखाना मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि फोरी समुदाय को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करना जारी रखा जाएगा, जिनके पारंपरिक कौशल मखाना प्रसंस्करण के लिए अभिन्न हैं। उन्होंने कहा कि जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना की ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली समुद्री खेप बिहार के कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाती है और किसानों तथा निर्यातकों के लिए नए अवसर खोल रही है।

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एपीडा ने बिहार सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से इस निर्यात को सुगम बनाया। एपीडा क्षमता निर्माण, बाजार विकास पहलों, निर्यात सुविधा और हितधारक सहभागिता के माध्यम से मखाना निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रहा है। प्राधिकरण ने बाजार पहुंच सुविधा और समन्वय में भी निर्यातकों का समर्थन किया, जिससे ऑस्ट्रेलिया तक खेप की निर्बाध आवाजाही में योगदान मिला।

भारत के मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है। इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए वित्त विधेयक, 2025 के तहत जुलाई 2025 से मखाना के लिए एक अलग एचएस कोड प्रभावी हुआ। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान, भारत ने अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका सहित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया।

एपीडा देश भर के किसानों के लिए सतत निर्यात-आधारित विकास के अवसर सृजित करते हुए भारत के कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों, निर्यातकों, स्टार्टअप्स, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीओसी) और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर लगातार काम कर रहा है।

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