पटना, 19 अगस्त 2026

बिहार के स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवशाली विरासत के साक्षी ऐतिहासिक बिहार विद्यापीठ, सदाकत आश्रम, पटना में 15 अगस्त को 80वाँ स्वतंत्रता दिवस समारोह श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रीय गौरव के वातावरण में मनाया गया। बिहार विद्यापीठ परिसर स्थित ऐतिहासिक झंडा चौक पर प्रातः 10:15 बजे बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश, भा.प्र.से. (सेवानिवृत्त) ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रध्वज को सलामी दी गई तथा राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान का सामूहिक गायन हुआ।

इस अवसर पर अपने संबोधन में विजय प्रकाश ने कहा कि बिहार विद्यापीठ का झंडा चौक केवल एक ध्वजारोहण स्थल नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता चेतना और राष्ट्रीय संकल्प का ऐतिहासिक प्रतीक है। वर्ष 1930 में लाहौर के रावी तट पर कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज का ऐतिहासिक संकल्प लिया गया था। इसके बाद देशवासियों से 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने तथा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर पूर्ण स्वाधीनता के संकल्प को दोहराने का आह्वान किया गया। बिहार विद्यापीठ के इस परिसर में भी उस राष्ट्रीय भावना को अभिव्यक्ति मिली और झंडा चौक राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बना। कालांतर में यही स्थान स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वजारोहण की गौरवशाली परंपरा का साक्षी बनता रहा।

उन्होंने कहा कि 1921 में असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि में स्थापित बिहार विद्यापीठ, महात्मा गांधी के स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा तथा विदेशी शासन की संस्थाओं के बहिष्कार के आह्वान से प्रेरित राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि था। यह संस्था केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं थी, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय जागरण, वैचारिक मंथन और स्वतंत्रता-संग्राम की रणनीति निर्माण का भी महत्वपूर्ण केंद्र रही।

बिहार विद्यापीठ परिसर का इतिहास देश के अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं की स्मृतियों से जुड़ा हुआ है। तत्कालीन राष्ट्रीय नेताओं, सत्याग्रहियों, स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों का इस परिसर में निरंतर आना-जाना रहा। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के भी बिहार विद्यापीठ परिसर में ठहरने का उल्लेख मिलता है। इस ऐतिहासिक परिसर का कण-कण राष्ट्रीय आंदोलन की अनेक घटनाओं और स्वतंत्रता संघर्ष की स्मृतियों को अपने भीतर संजोए हुए है।

बिहार विद्यापीठ की गौरवशाली परंपरा का संबंध देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से भी अत्यंत गहरा रहा है। वे बिहार विद्यापीठ राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्राचार्य एवं रजिस्ट्रार रहे। मौलाना मजहर-उल-हक इसके चांसलर तथा बाबू ब्रजकिशोर प्रसाद वाइस-चांसलर रहे। देश के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में अपने दायित्वों से मुक्त होने के बाद भी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने बिहार विद्यापीठ परिसर को अपने जीवन के अंतिम चरण में अपना प्रिय निवास और कर्मभूमि बनाया। इस प्रकार यह परिसर देश के अनेक महान विभूतियों की तपस्या, सेवा और राष्ट्रीय समर्पण का केंद्र रहा है।

समारोह में देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं प्रशिक्षुगण, बिहार विद्यापीठ के पदाधिकारी एवं कर्मचारी, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से बिहार विद्यापीठ के सचिव डॉ. राणा अवधेश, भा.प्र.से. (सेवानिवृत्त), वित्त सचिव डॉ. नीरज सिन्हा, प्राचार्य डॉ. पूनम वर्मा, सदस्य विवेक रंजन, निदेशक, लोक स्वास्थ्य अजीत कुमार सिंह, संयुक्त सचिव,अवधेश के नारायण एआईसी बिहार विद्यापीठ फाउंडेशन के सीईओ प्रमोद कुमार कर्ण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

बिहार विद्यापीठ बीएमपी कैंप के सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रध्वज को सलामी दी गई। सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। उपस्थित जनसमुदाय ने स्वतंत्रता आंदोलन के अमर सेनानियों, शहीदों और राष्ट्रनिर्माताओं के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की।

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