पटना 19 अगस्त 2026

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), क्षेत्रीय केन्द्र पटना के सहयोग से रूट एआई द्वारा आज 19 अगस्त 2026 को इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र, पटना में “कार्यस्थल पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाना एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम कार्यालय संस्कृति का निर्माण” विषय पर दो घंटे की व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी, व्यावहारिक, जिम्मेदार एवं नैतिक उपयोग के प्रति प्रतिभागियों को जागरूक एवं प्रशिक्षित करना था। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को ई-मेल एवं कार्यालयीन संचार, नोटिस, पत्र एवं ज्ञापन तैयार करने, विद्यार्थी सहायता सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग तथा जिम्मेदार एवं नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र पटना के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. ई. कृष्ण राव ने अपने संबोधन में कार्यस्थल पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में बदलती तकनीक के साथ स्वयं को अनुकूलित करना समय की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल एक तकनीकी उपकरण के रूप में न देखकर कार्यक्षमता, उत्पादकता और सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

कार्यशाला के विशेषज्ञ प्रोफेसर अमरेंद्र नारायण, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, विज्ञान महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल अवधारणाओं तथा उसके वैज्ञानिक आधार पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पीछे कार्य करने वाले भौतिकी के सिद्धांतों, इसके सॉफ्टवेयर माध्यमों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कार्य करने की प्रक्रिया को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक सॉफ्टवेयर या अनुप्रयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे विज्ञान, गणना और तकनीकी प्रक्रियाओं की एक व्यापक संरचना कार्य करती है।

इस अवसर पर उप कुलसचिव, इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र पटना, ओझा जयप्रकाश ने तकनीकी परिवर्तन के साथ स्वयं को अनुकूलित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्यस्थल में तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समझकर और उचित तरीके से अपनाकर कार्यालयीन कार्यों को अधिक प्रभावी, त्वरित एवं व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. नीलू शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “हमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मित्र बनना है, लेकिन उसका आदी नहीं बनना है।” उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुकूलन और उस पर निर्भरता के बीच के सूक्ष्म अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें इस अंतर को समझने की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे कार्यों में सहयोगी और सहायक हो सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय, मानवीय विवेक, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सदैव मनुष्य के पास रहनी चाहिए।

दो घंटे के इस व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र का संचालन विजय कुमार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षक-सह-संसाधन व्यक्ति, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, बिहार द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को दैनिक कार्यालयीन कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी तथा विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से समय और श्रम की बचत करते हुए कार्य की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।

इसके साथ ही इंजीनियर विजय यादव, सह-संस्थापक, रूट एआई द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों को रूट एआई के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के उपयोग का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने स्वयं विभिन्न कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों का प्रयोग किया और अपने दैनिक कार्यों से संबंधित उदाहरणों पर व्यावहारिक अभ्यास किया।

कार्यशाला में इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र पटना के अधिकारी एवं कर्मचारी, अकादमिक परामर्शदाता तथा शिक्षार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग को लेकर उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित विभिन्न प्रश्नों और जिज्ञासाओं पर विशेषज्ञों के साथ संवाद किया।

कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाना केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी आधुनिक कार्यालय संस्कृति का निर्माण करना है, जिसमें तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय विवेक, नैतिकता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी समान रूप से महत्वपूर्ण हों।

इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र पटना द्वारा आयोजित यह कार्यशाला कर्मचारियों, अकादमिक परामर्शदाताओं एवं शिक्षार्थियों को बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप स्वयं को तैयार करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदार एवं प्रभावी उपयोग सीखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

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