पटना, 31 अगस्त 2026
जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता डा0 निहोरा प्रसाद यादव ने जारी बयान में लालू प्रसाद पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि साल 1996 में हुई गंगा जल संधि पर तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की चुप्पी ने बिहार के हितों को बड़ा नुकसान पहुंचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए राज्य का नुकसान कराना आरजेडी की पुरानी फितरत रही है।

उन्होंने कहा कि साल 1996 में केंद्र में तत्कालीन संयुक्त मोर्चे की सरकार में हुई फरक्का जल संधि के दौरान लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और केंद्र की सरकार में प्रभावशाली भूमिका में थे। इसके बावजूद उन्होंने बिहार के हितों से समझौता होने दिया और इस संधि के खिलाफ एक भी आवाज नहीं उठाई। लालू प्रसाद यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान केंद्रीय विदेश मंत्री आई के गुजराल थे, जिनसे लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी संबंध थे। अगर लालू प्रसाद यादव चाहते तो उन संबंधों का हवाला देकर वो इस संधि को रुकवाने का काम कर सकते थे। लेकिन लालू प्रसाद यादव ने अपने हितों के आगे बिहार के हितों की बलि चढ़ाने का काम किया।

लालू प्रसाद यादव से सवाल पूछते हुए उन्होंने कहा कि आज जब जद (यू) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने इस संधि के नवीनीकरण का विरोध करते हुए राज्यसभा में अपनी बात जोर-शोर से उठाई तब जाकर लालू प्रसाद यादव को बिहार का हित याद आने लगा। सालों तक इस मसले पर चुप्पी साधे रहने वाले लालू प्रसाद यादव को अचानक से बिहार में पानी की कमी, किसानों, मछुआरों की याद आने लगी जबकि साल 1996 से लेकर साल 2011 तक उन्होंने इस मामले पर चुप्पी साधे रखी।

लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सच्चाई ये है कि चारा घोटाले में अभियुक्त घोषित हो चुके लालू प्रसाद यादव ने जेल जाने के डर से इस संधि को लेकर चुप्पी साध ली और बिहार की हकमारी होने दी। जबकि नीतीश कुमार ने हमेशा इस संधि का विरोध किया और फरक्का बराज के निर्माण से गंगा की अविरलता, गाद समस्या की बात उठाई। उन्होंने हमेशा इस संधि के प्रावधानों का विरोध किया और बिहार को इससे हो रहे नुकसान की बात राष्ट्रीय स्तर पर उठाई। नीतीश कुमार ने वैज्ञानिक तरीके से एवं आंकड़ों के आधार पर फरक्का बराज के चलते गंगा नदी में गाद प्रबंधन की बात कई बार बेबाक तरीके से रखी। उन्होंने फरक्का बराज की समीक्षा और मूल समस्या के समाधान की मांग की।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही इस संधि का नवीनीकरण ना हो इसको लेकर जद (यू) पूरे जोर-शोर से अपनी मांगें केंद्र सरकार के समक्ष रखेगी और तर्कों के आधार पर केंद्र सरकार को मनाने का प्रयास करेगी।
![]()
