किसी ने सच ही कहा है – “गुरु बिना ज्ञान कहाँ”
पटना 05 सितम्बर 2026
5 सितम्बर का दिन केवल एक तारीख नहीं है। यह उस परंपरा को नमन करने का दिन है, जिसने हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का साहस दिखाया। यह दिन है भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती का, जिन्होंने कहा था – “मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय, इस दिन को शिक्षकों के सम्मान के दिन के रूप में मनाया जाए।
“शिक्षक कौन है?शिक्षक केवल Blackboard पर लिखने वाला व्यक्ति नहीं है। शिक्षक वह कुम्हार है जो गीली मिट्टी जैसे बच्चों को आकार देता है। माता-पिता हमें जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक हमें जीवन जीना सिखाता है।
आज के समय में जब गूगल पर हर सवाल का जवाब एक क्लिक में मिल जाता है, तब शिक्षक की भूमिका और भी बड़ी हो जाती है। गूगल हमें सूचना देता है, पर शिक्षक हमें सद्बुद्धि देता है। गूगल बताता है कि क्या है, पर शिक्षक बताता है कि क्यों है और कैसे जीना है।
हमारे जीवन में तीन गुरु होते हैं -पहला गुरु – माँ, जो बोलना सिखाती है।दूसरा गुरु – पिता, जो चलना सिखाता है।और तीसरा गुरु – शिक्षक, जो जीवन में चलने का सही रास्ता दिखाता है।

मुझे याद है, मेरे एक शिक्षक ने कहा था – “तुम्हें 90% अंक लाने के लिए नहीं पढ़ा रहा हूँ, तुम्हें 90% गलत होने पर भी खड़े रहने की हिम्मत देने के लिए पढ़ा रहा हूँ।” यही एक सच्चे शिक्षक की पहचान है।
आज के युग में शिक्षक का सम्मान क्यों जरूरी है?आज हम चंद्रयान बना रहे हैं, AI की बात कर रहे हैं, पर इन सबके पीछे किसी न किसी शिक्षक का हाथ है। एक डॉक्टर, एक इंजीनियर, एक कलेक्टर, यहाँ तक कि एक प्रधानाचार्य भी पहले किसी शिक्षक का छात्र ही रहा है।इसलिए शिक्षक दिवस केवल फूल और कार्ड देने का दिन नहीं है, बल्कि यह प्रण लेने का दिन है कि हम अपने गुरुओं का सम्मान केवल एक दिन नहीं, जीवन भर करेंगे। उनकी बताई हुई राह पर चलेंगे।अंत में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के शब्दों में -“शिक्षक का उद्देश्य हर बच्चे को एक-दूसरे से अलग समझना और उसकी अलग क्षमता को पहचानना है।”
हमारे विद्यालय के सभी आदरणीय गुरुओं को जिन्होंने हमें इस योग्य बनाया कि हम आज कलम पकड़ सकें, उन्हें शत्-शत् नमन।जय हिन्द, जय गुरु!
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