पटना,09 सितम्बर 2026

जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता डा0 अनुप्रिया यादव ने कहा कि फरक्का बराज और गंगा जल संधि के कारण बिहार को लंबे समय से बाढ़ गाद और जल प्रबंधन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि संधि के समय ही बिहार के हितों और चिंताओं को मजबूती से रखा गया होता तो आज राज्य को इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में आई बाढ़ की आपदा में राजनीतिक अवसर तलाशने की बजाय विपक्ष को अपनी पुरानी भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए। वर्ष 1996 में जब फरक्का जल संधि हुई, उस समय बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे। यदि उस समय बिहार के हितों की मजबूती से पैरवी की गई होती तो आज स्थिति अलग होती।

डा0 यादव ने कहा कि जद (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जी ने संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में फरक्का जल संधि का मुद्दा मजबूती से उठाया है। उन्होंने कहा कि संधि के नवीनीकरण के समय बिहार के आगामी दशकों के पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। बिहार के हितों के साथ अब कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गंगा नदी से जुड़े बिहार के 12 जिलों में चल रहे ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के माध्यम से संजय झा जी एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा जी लगातार जनता से संवाद कर रहे हैं और गंगा जल संधि से जुड़े बिहार के हितों एवं समस्याओं को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

पार्टी प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि नीतीश कुमार जी ने हमेशा फरक्का बराज, गंगा में बढ़ती गाद और बिहार के जल हितों का मुद्दा मजबूती से उठाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात कर भी बिहार के हितों से जुड़े इन मुद्दों को प्रमुखता से रखा।

उन्होंने कहा कि बिहार की जनता यह भली-भांति जानती है कि किसने राजनीतिक स्वार्थ में बिहार के हितों से समझौता किया और कौन आज बिहार के हक की लड़ाई मजबूती से लड़ रहा है। विपक्ष को आपदा में अवसर तलाशने के बजाय बिहार के हित में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

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