पटना, 17 सितम्बर 2026

बिहार विद्यापीठ के संस्थापक सदस्य चतुरानन दास के पुण्य स्मरण दिवस पर देशरत्न सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।इस अवसर पर कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

“चतुरानन दास जैसी महान विभूतियों का निर्माण केवल व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक संस्कारों से होता है। यह गंभीर अनुसंधान का विषय है कि आखिर उन परिवारों में वे कौन सी सांस्कृतिक परंपराएं और मूल्य रहे, जिन्होंने देश को ऐसे कर्मशील स्वतंत्रता सेनानी दिए।”

यह विचार बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश (से.नि. भा.प्र.से.) ने व्यक्त किए। वे सदाकत आश्रम स्थित देशरत्न सभागार में बिहार विद्यापीठ के संस्थापक सदस्य एवं स्वतंत्रता सेनानी मिथिला विभूति चतुरानन दास के पुण्य स्मरण दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता कर रहे थे।

विजय प्रकाश (से.नि. भा.प्र.से.) ने कहा कि चतुरानन दास जी का जीवन नई पीढ़ी के लिए एक सशक्त प्रेरणा-पुंज है। उनके आदर्शों, किसान जागरण और जनसेवा के संकल्पों को आज शिक्षा व समाजसेवा के माध्यम से ही आगे बढ़ाया जा सकता है।कार्यक्रम का शुभारंभ चतुरानन दास जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

प्रमुख वक्ताओं ने साझा किए संस्मरण

श्यामानंद चौधरी (अपर सचिव, बिहार विद्यापीठ) ने अतिथियों का स्वागत करते हुए चतुरानन दास जी के कृतित्व और व्यक्तित्व से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को साझा किया।

प्रकाश चन्द्र दास एवं विकास चन्द्र दास (पुत्र, स्व. चतुरानन दास) ने अपने पिता के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, सामाजिक सरोकारों और परिवार से जुड़े मार्मिक संस्मरणों को साझा करते हुए भावपूर्ण स्मरण-वक्तव्य दिया।

डॉ. राणा अवधेश (सचिव, बिहार विद्यापीठ) ने चतुरानन दास जी के राष्ट्र निर्माण एवं जनसेवा में दिए गए अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया।

डॉ. मृदुला प्रकाश (निदेशक, शिक्षा-संस्कृति एवं संग्रहालय) ने कहा कि आज का दिन केवल स्मरण का नहीं, बल्कि संकल्प लेने का है कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।

संक्षिप्त परिचय:

चतुरानन दास (24 अगस्त 1898 – 17 सितम्बर 1938) बिहार के स्वाधीनता आंदोलन, किसान आंदोलन और लोक-कल्याण से जुड़े प्रखर व्यक्तित्व थे। बिहार विद्यापीठ से उनका गहरा जुड़ाव राष्ट्रीय शिक्षा और स्वतंत्रता संग्राम की उस साझा विरासत का प्रतीक है, जिसे संस्था आज भी संजोए हुए है।

कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक चन्द्रकांत आर्य ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव अवधेश नारायण ने किया। सभा में संस्था के वरिष्ठ सदस्य, प्राध्यापक और कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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