पटना, 25 सितम्बर 2026
भविष्य की प्रौद्योगिकीय संभावनाओं, नवाचार और उभरते अवसरों को समझने के उद्देश्य से एआईसी-बीवी फाउंडेशन के तत्वावधान में देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, बिहार विद्यापीठ, पटना के सहयोग से आज देशरत्न सभागार में ‘प्रौद्योगिकी विज़न 2035’ विषय पर एक विशेष मास्टर क्लास का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, युवा नवाचारकर्ताओं एवं नवोदित उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में एआईसी-बीवी फाउंडेशन के सीईओ प्रमोद कुमार कर्ण ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मास्टर क्लास की पृष्ठभूमि और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते प्रौद्योगिकी परिवेश में युवाओं को नई तकनीकों, नवाचार और उद्यमिता की संभावनाओं से परिचित कराना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त विजय प्रकाश ने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत करते हुए ‘प्रौद्योगिकी विज़न 2035’ की व्यापक प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भविष्य की प्रौद्योगिकी को केवल तकनीकी विकास के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल-विकास, उद्यमिता और सामाजिक परिवर्तन से जोड़कर देखने की आवश्यकता है।
मास्टर क्लास के मुख्य वक्ता एएसपीएल फ्यूजन (ASPL Fusion) के सीईओ एवं सह-संस्थापक ने ‘प्रौद्योगिकी विज़न 2035’ के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति तथा उद्योग जगत की बदलती आवश्यकताओं के संदर्भ में भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया।
विशेषज्ञ ने व्यावहारिक उदाहरणों और केस स्टडी के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव केवल उद्योग और व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, रोजगार, कौशल, उद्यमिता और सामाजिक विकास के स्वरूप को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने युवाओं को बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप निरंतर सीखने, प्रयोग करने और नवाचार की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मास्टर क्लास का एक महत्वपूर्ण आकर्षण संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र रहा। विद्यार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, स्टार्टअप, तकनीकी कौशल तथा भविष्य की कार्य-संस्कृति से संबंधित प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए तकनीकी विकास के व्यावहारिक पक्षों तथा उभरते अवसरों पर अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मृदुला प्रकाश, निदेशक, शिक्षा, संस्कृति एवं संग्रहालय ने मुख्य वक्ता, अतिथियों, प्रतिभागियों तथा आयोजन दल के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की शिक्षा से आगे बढ़कर भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
मास्टर क्लास ने प्रतिभागियों को वर्ष 2035 की संभावित प्रौद्योगिकीय दुनिया, उसमें आवश्यक कौशल तथा नवाचार एवं उद्यमिता की संभावनाओं पर विचार करने के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान किया।
![]()
