पटना,16 अक्टूबर 2026

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा भारतमाला परियोजना के अंतर्गत वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 672 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड, छह-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है।

इस एक्सप्रेसवे के पैकेज-VII का निर्माण बिहार के गया जिले में अनारबनसलेया गांव से सगरामपुर गांव तक, किलोमीटर 151+200 से किलोमीटर 184+700 के बीच किया जा रहा है। इस पैकेज की कुल लंबाई 33.5 किलोमीटर है तथा परियोजना की लागत ₹1,248.37 करोड़ है। इसका क्रियान्वयन हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है।

परियोजना में अब तक लगभग 36 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई है। निर्माण कार्य के तहत आधुनिक सड़क अवसंरचना विकसित करने के लिए विभिन्न पुलों, फ्लाईओवर, अंडरपास और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

मीडिया टूर के माध्यम से निर्माण कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन

परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्यों और तकनीकी विशेषताओं से मीडिया प्रतिनिधियों को अवगत कराने के उद्देश्य से NHAI, क्षेत्रीय कार्यालय पटना द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे के पैकेज-VII में मीडिया टूर का आयोजन किया गया। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने परियोजना स्थल का दौरा कर निर्माण कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

मीडिया टूर के दौरान NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र कुमार बंसल ने मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित किया तथा वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे के पैकेज-VII की प्रगति, निर्माण कार्यों, तकनीकी विशेषताओं और परियोजना के क्षेत्रीय महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए मीडिया प्रतिनिधियों के सवालों का भी जवाब दिया।

इसके पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों ने परियोजना स्थल का भ्रमण कर निर्माण कार्यों एवं विभिन्न संरचनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस दौरान परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण की प्रमुख गतिविधियों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से इसके महत्व से संबंधित जानकारियां साझा की गईं।

इस अवसर पर NHAI के डिप्टी मैनेजर राजन कुमार शर्मा, क्षेत्रीय कार्यालय, पटना से मैनेजर सुबोध चौधरी एवं डिप्टी मैनेजर कैलाश अग्रवाल तथा परियोजना प्रबंधक प्रणय कुमार उपस्थित रहे।

आधुनिक संरचनाओं से सुगम और सुरक्षित आवागमन

पैकेज-VII में यातायात को सुगम बनाने और सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न आधुनिक संरचनाओं का प्रावधान किया गया है। इनमें 3 प्रमुख पुल, 9 छोटे पुल, 8 फ्लाईओवर एवं एलिवेटेड संरचनाएं, 19 व्हीकुलर अंडरपास (VUP/SVUP/LVUP), 2 EUP, 2 CUP, 2 एलीफेंट अंडरपास, 2 एनिमल ओवरपास, 107 बॉक्स कल्वर्ट, 1 इंटरचेंज और 1 टोल प्लाजा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यात्रियों की सुविधा के लिए 2 रेस्ट एरिया का भी प्रावधान किया गया है।

ये संरचनाएं स्थानीय यातायात को बेहतर बनाने, विभिन्न मार्गों के बीच संपर्क सुगम करने तथा सड़क उपयोगकर्ताओं और वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही में सहायक होंगी।

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन पर विशेष ध्यान

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को भी महत्व दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत लगभग 45,000 पौधे लगाने का प्रस्ताव है। बिहार वन विभाग और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के सहयोग से संरक्षण एवं वन्यजीव शमन योजना तैयार की गई है। इस उद्देश्य से NHAI द्वारा वन विभाग को लगभग ₹50 करोड़ उपलब्ध कराए गए हैं। योजना में वन्यजीवों के आवास में सुधार, चयनित अनुसूची-I प्रजातियों के संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण, वनाग्नि प्रबंधन तथा निगरानी और मूल्यांकन जैसे उपाय शामिल हैं।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे के विकसित होने से क्षेत्र में सड़क संपर्क बेहतर होने, यात्रा समय और वाहन परिचालन लागत में कमी आने तथा माल एवं यात्री परिवहन को अधिक सुगम बनाने की उम्मीद है। परियोजना से गया सहित आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, रोजगार के अवसरों और पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

गया एवं आसपास के क्षेत्र में बोधगया, देव स्थित सूर्य मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल हैं। बेहतर सड़क संपर्क से इन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय व्यापार, परिवहन और विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

NHAI द्वारा परियोजना का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों और सुरक्षा प्रावधानों के अनुरूप आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। यह परियोजना बिहार में आधुनिक सड़क अवसंरचना को मजबूत करने तथा राज्य को देश के प्रमुख आर्थिक एवं परिवहन गलियारों से बेहतर तरीके से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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