पटना,16 अक्टूबर 2026
बिहार के विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने तथा शिक्षकों को निरंतर एवं प्रभावी शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT), बिहार में 13 से 16 अक्टूबर 2026 तक कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर समन्वयकों (CRCCs) के राज्यव्यापी प्रशिक्षण हेतु जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) के 152 व्याख्याताओं का मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दो चरणों में आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य DIET व्याख्याताओं की मेंटरिंग एवं प्रशिक्षण संबंधी क्षमताओं को सुदृढ़ करना है, ताकि वे आगे CRCCs को प्रशिक्षित कर सकें। इसके माध्यम से CRCCs की शैक्षणिक नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा विद्यालय स्तर पर शिक्षकों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने की दिशा में एक प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान चंदन कुमार द्विवेदी, सहायक निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राज्य स्तर पर निर्धारित शैक्षणिक प्राथमिकताओं को विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने में DIETs एवं मास्टर ट्रेनर्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण के माध्यम से विकसित समझ एवं क्षमताओं को आगे CRCCs के प्रशिक्षण और विद्यालय स्तर पर शैक्षणिक सहयोग की प्रक्रिया में प्रभावी रूप से लागू किया जाना आवश्यक है।

वहीं, डॉ. स्नेहाशीष दास ने मेंटरिंग की प्रक्रिया में पाँच मूलभूत स्तंभों—विश्वास, निरंतरता, चिंतन, सम्मान एवं साझेदारी—के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मेंटरिंग का उद्देश्य केवल कक्षा का निरीक्षण करना नहीं, बल्कि शिक्षकों के साथ विश्वासपूर्ण एवं सम्मानजनक संबंध विकसित करते हुए उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं को समझना और उनके सतत् व्यावसायिक विकास के लिए सहयोग करना है। इन मूलभूत स्तंभों के आधार पर शिक्षकों को अपनी शिक्षण प्रक्रियाओं पर चिंतन करने, अनुभव साझा करने तथा सुधार के लिए मिलकर समाधान विकसित करने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान मेंटरिंग की अवधारणा एवं उद्देश्य, बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान (FLN) के लक्ष्य, कक्षा-अवलोकन की प्रक्रिया, टीचर सक्सेस फ्रेमवर्क (TSF) तथा कक्षा-अवलोकन टूल (COT) के उपयोग जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को कक्षा-अवलोकन से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर शिक्षकों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को समझने, उनकी प्रभावी शिक्षण पद्धतियों की पहचान करने तथा सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों में रचनात्मक प्रतिपुष्टि प्रदान करने की प्रक्रिया से परिचित कराया गया। साथ ही, अवलोकन के निष्कर्षों के आधार पर शिक्षकों के साथ मिलकर सुधार की रणनीतियाँ तैयार करने तथा आगे की शैक्षणिक सहयोग प्रक्रिया की योजना बनाने पर भी जोर दिया गया।

प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि प्रभावी मेंटरिंग एक सतत् प्रक्रिया है, जो कक्षा-अवलोकन से शुरू होकर साक्ष्य-आधारित प्रतिपुष्टि, आवश्यकता-आधारित सहयोग और नियमित फॉलो-अप तक जाती है। इस प्रक्रिया में CRCCs की भूमिका निरीक्षक के बजाय एक सहयोगी शैक्षणिक मेंटर की होती है, जो शिक्षकों को उनकी चुनौतियों को समझने, अपनी शिक्षण पद्धतियों पर चिंतन करने तथा कक्षा में बेहतर शिक्षण-अधिगम वातावरण विकसित करने में सहयोग प्रदान करते हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में स्वयं सेवी संस्थान मंत्रा4चेंज, प्रथम, सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन एवं इन्वॉल्व के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।

यह पहल बिहार में विद्यालय स्तर पर शैक्षणिक सहयोग की व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, सतत् एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से CRCCs की मेंटरिंग क्षमताओं को विकसित करने से शिक्षकों को नियमित, साक्ष्य-आधारित एवं आवश्यकता-केंद्रित शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। दीर्घकाल में, यह व्यवस्था शिक्षकों के सतत् व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने, कक्षा-कक्ष में शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा बच्चों के सीखने के अनुभवों और अधिगम उपलब्धियों को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती है।
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