पटना 26 अक्टूबर 2026

बिहार जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि हमारे सर्वमान्य नेता मा0 श्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘बिहार म्यूजियम’ को वर्ष 2026 में ‘‘वर्थ अ जर्नी’ की ओर से प्रकाशित विश्व के 100 बेहतरीन संग्रहालयों की सूची में साल 2026 की वैश्विक रैंकिंग नौवाँ स्थान और एशिया में प्रथम स्थान प्राप्त होना पूरे 14 करोड़ बिहारवासियों के लिए गौरव का क्षण है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से राज्यभर में खुशी की लहर है। श्री कुशवाहा ने इस उपलब्धि के लिए नीतीश कुमार के प्रति आभार प्रकट करते हुए समस्त बिहारवासियों को हार्दिक बधाई दीं।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार म्यूजियम नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच और बिहार की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिकता के साथ संरक्षित करने की प्रतिबद्धता का परिणाम है। बिहार सरकार ने जुलाई 2011 में इस विश्वस्तरीय परियोजना के लिए कनाडा की कंसल्टेंसी ‘लाॅर्ड कल्चरल रिसोर्स’ के साथ समझौता किया था। जून 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी आधारशिला रखी। उनकी विशेष रुचि और देखरेख में निर्माण कार्य आगे बढ़ा और वर्ष 2017 में इसे पूर्ण रूप से राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया।

श्री कुशवाहा ने कहा कि बिहार म्यूजियम को पटना म्यूजियम से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना भी राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग के निर्माण की इस परियोजना का शिलान्यास 3 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने किया था।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार म्यूजियम की विशेषता इसकी आधुनिक वास्तुकला और यहाँ संरक्षित हजारों वर्षों की ऐतिहासिक विरासत है। दीदारगंज यक्षी की विश्वप्रसिद्ध प्रतिमा से लेकर मौर्य, गुप्त और पाल काल, सम्राट अशोक, बौद्ध एवं जैन परंपराओं तथा शेरशाह सूरी और मुगल काल से जुड़ी धरोहरें बिहार के गौरवशाली अतीत को जीवंत करती हैं। इसके अतिरिक्त पटना स्कूल ऑफ़ पेंटिंग की कलाकृतियाँ, कांस्य प्रतिमाएँ, टेराकोटा कलाकृतियाँ और दुर्लभ सिक्कों का संग्रह देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है।

अंत में श्री कुशवाहा ने कहा कि जो विपक्ष झूठ और भ्रम के सहारे बिहार की नकारात्मक छवि पेश करने की राजनीति करता है, उसके लिए विश्व स्तर पर बिहार म्यूजियम को मिला यह सम्मान एक करारा जवाब है। नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप आज बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

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