पटना 8 सितम्बर 2024

दस दिवसीय जैन पर्युषण पर्व के पहले दिन क्षमा धर्म की पूजा होती है । आज पटना के मीठापुर, कदमकुआँ, मुरादपुर, कमलदह मंदिर गुलजार बाग सहित सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में क्षमा धर्म की पूजा की गयी ।इससे पहले सभी मंदिरों में दस दिनों के लिए ध्वजारोहण किया गया । दस दिनों के लिए पूजा के पात्रों का चयन किया गया। भगवान् का अभिषेक एवं शान्तिधारा की गयी । जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि कदमकुआं स्थित श्रीपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व सम्पन्न कराने सात प्रतिमाधारी प्राची दीदी एवं तीन प्रतिमाधारी निक्की दीदी पधारी हैं जिनके सानिध्य में दसलक्षण पर्व की पूजा प्रारम्भ हुई। साथ ही इस पूजा को संगीतमय बनाने फिरोजाबाद से संगीतकार सेंकी जैन अपने ग्रुप के साथ पधारे हैं। एम पी जैन ने बताया कि दसलक्षण पर्व में मनुष्य की आत्मा के दस गुणों की पूजा की जाती है ।

जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि जैन मुनि प्रमाण सागर जी ने क्षमा धर्म के सम्बन्ध में कहा कि क्षमा आत्मा का धर्म है, इसलिए जो मानव अपना कल्याण चाहते हैं, उन्हें हमेशा इस भावना की रक्षा करनी चाहिए। क्षमावान् मनुष्य का इस लोक और परलोक में कोई शत्रु नहीं होता है। सहन करने में समाधान है, जवाब देने में संघर्ष। एक गुणवान मनुष्य जिसे बिना कारण ही क्रोध उत्पन्न हुआ करता है उसका कोई भी सम्मान नहीं करता है। क्रोध का एक ही कारण है – ‘अपेक्षा’, अर्थात, जिसकी जितनी ज्यादा अपेक्षा है उतना ज्यादा क्रोध| क्षमा यह आत्मा का धर्म है, इसलिए जो मानव अपना कल्याण चाहते हैं, उन्हें हमेशा इस भावना की रक्षा करनी चाहिए। क्षमावान् मनुष्य का इस लोक और परलोक में कोई शत्रु नहीं होता है। सहन करने में समाधान है, जवाब देने में संघर्ष।

एक गुणवान मनुष्य जिसे बिना कारण ही क्रोध उत्पन्न हुआ करता है उसका कोई भी सम्मान नहीं करता है। क्रोध का एक ही कारण है – ‘अपेक्षा’, अर्थात, जिसकी जितनी ज्यादा अपेक्षा होती है पूरा नहीं होने पर उतना ज्यादा क्रोध होता है । एम पी जैन ने बताया कि क्रोध का भाव एक ज्वलनशील भाव है जो व्यक्ति को विवेक शून्य बनाकर स्वयं के हित अहित की भावना का हरण कर अनर्थ करवाता है । इससे मनुष्य विपत्तियों को अपने जीवन में न्योता दे देता है । क्रोध धैर्य व ज्ञान का नाश करने के बाद सर्वस्व नाश कर देता है । इस संसार में क्रोध के सामान कोई दूसरा शत्रु नहीं है ।

जैन ने बताया कि क्रोध एक कषाय है। जो व्यक्ति को अपनी स्थिति से विचलित कर देती है। इस कषाय के आवेग में व्यक्ति विचार शून्य हो जाता है और हिताहित का विवेक खोकर कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। लकड़ी में लगने वाली आग जैसे दूसरों को जलाती ही है, पर स्वयं लकड़ी को भी जलाती है। इसी तरह क्रोध कषाय के स्वरूप को समझ लेना और उस पर विजय पा लेना ही क्षमा धर्म है। यह पर्व अपने आपमें ही क्षमा का पर्व है। इसलिए जिस किसी से भी आपका बैरभाव है, उससे शुद्ध हृदय से क्षमा मांग कर मैत्रीपूर्ण व्यवहार करें। राग-द्वेष को अपने मन में स्थायी घर न बनाने दें। क्षमा से बैरभाव को शांत करें। क्रोध मनुष्य का शत्रु है और क्षमा ही सच्चा मित्र है। इस बात को हमेशा ध्यान में रखें। ‘क्षमा वीरस्य भूषणम्‌’ अर्थात्‌ क्षमा करना वीर का ही स्वभाव होता है। जिसने अपने राग-द्वेष, क्रोध, कषाय, अहंकार, लोभ-लालच आदि से मुक्ति पाकर अपने मन में क्षमा का अस्त्र धारण कर लिया हो वह वीर होता है । जहां मन में क्षमा भाव आ जाता है तो क्रोध, मान, माया, लोभ आदि सभी कषाय स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य प्रफुल्लित होकर सारे बैरभाव भूलकर क्षमा के रास्ते पर चल पड़ता है।

क्षमा धर्म है सबसे प्यारा, आतम का स्वभाव है न्यारा || क्रोध विकारी भाव है, उससे होते पाप हैं । क्षमा जीव का गहना है, मुनिराजों का कहना है ।। क्रोध बढ़े तो शांत रहो, अपने में विश्राम करो |जैन ने बताया कि कल पर्युषण पर्व के दूसरे दिन सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में मार्दव धर्म की पूजा होगी । अहंकार पर विजय पाना ही मार्दव धर्म है । व्यक्ति अहंकार को त्यागकर दूसरों के प्रति विनम्रता के साथ मृदुता का आचरण करे ।

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