पटना 05 नवंबर 2026

दीपोत्सव का उल्लास जब रंगों, कल्पनाओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों से जुड़ा तो देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय का परिसर सृजनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना के रंगों से सराबोर हो उठा। बिहार विद्यापीठ द्वारा संचालित इस महाविद्यालय में बी.एड. प्रथम वर्ष के प्रशिक्षुओं ने दीपोत्सव के अवसर पर रंगोली प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक सोच का आकर्षक प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का समन्वयन एवं मार्गदर्शन महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिकाओं रिंपल कुमारी एवं कंचन कुमारी ने किया।

प्रतियोगिता में प्रशिक्षुओं को चार समूहों में विभाजित किया गया था। इन समूहों के नाम देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद ग्रुप, मौलाना मजहरुल हक ग्रुप, बाबू ब्रजकिशोर प्रसाद ग्रुप तथा महात्मा गांधी ग्रुप रखे गए थे। प्रत्येक समूह को एक अलग विषय पर रंगोली तैयार करने का दायित्व दिया गया था। भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता, स्वच्छ भारत–स्वस्थ भारत, बिहार की सांस्कृतिक विरासत तथा प्रकृति के सात रंग जैसे विषयों पर प्रशिक्षुओं ने रंगों और आकृतियों के माध्यम से अपनी कल्पनाशीलता को जीवंत रूप प्रदान किया। सभी समूहों की प्रस्तुतियों में कलात्मक कौशल के साथ सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक गौरव और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की झलक दिखाई दी।

इस अवसर पर बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त वरिष्ठ पदाधिकारी विजय प्रकाश ने प्रशिक्षुओं की सृजनात्मकता और कलात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपनी सभ्यता और संस्कृति से जुड़ाव हमारी पहचान तथा सांस्कृतिक चेतना का आधार है। नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराने और उसके संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूक बनाने में ऐसे आयोजन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बिहार विद्यापीठ की निदेशक (शिक्षा, संस्कृति एवं संग्रहालय) डॉ. मृदुला प्रकाश ने प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षण को उत्साह, उमंग और सकारात्मकता के साथ जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन को आनंदमय, रचनात्मक और संवेदनशील बनाना भी है।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम वर्मा ने प्रशिक्षुओं की कलात्मक प्रतिभा और सामूहिक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए सभी को दीपावली की शुभकामनाएँ दीं।

बिहार विद्यापीठ के संयुक्त सचिव अवधेश के नारायण ने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए सहयोगात्मक शिक्षण-अधिगम पद्धति की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामूहिक गतिविधियाँ प्रशिक्षुओं में सहभागिता, सहयोग, समन्वय और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती हैं। ये गुण भावी शिक्षकों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके व्यावसायिक कौशल के विकास में विशेष महत्त्व रखते हैं।

उल्लेखनीय है कि यह आयोजन बी.एड. पाठ्यक्रम के ई.पी.सी.-2 (EPC-2) के अंतर्गत क्रियात्मक गतिविधि के रूप में संपन्न हुआ। इसने प्रशिक्षुओं को कक्षा-कक्ष की पारंपरिक शिक्षण प्रक्रिया से आगे बढ़कर कला, संस्कृति और सामूहिक सृजन के माध्यम से सीखने एवं अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी सहायक प्राध्यापक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित थे।

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