पटना, 13 जनवरी 2026
कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि पारंपरिक लोक कलाओं, लोकगीतों एवं सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि विलुप्तप्राय लोकगीतों के संरक्षण की बहुत आवश्यकता है। इस पर विशेष रुप से ध्यान दिया जाए। मंत्री श्री प्रसाद मंगलवार को बिहार संग्रहालय में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, विभागीय योजनाओं की समीक्षा तथा कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने मार्च–अप्रैल माह में मुंबई में फिल्म निर्माता–निर्देशकों के साथ बैठक आयोजित किए जाने का निर्देश दिया, जिससे कि बिहार फिल्म नीति से संबंधित हितधारकों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सके। उन्होंने संग्रहालयों में संरक्षित कलाकृतियों के मास्टर डाटा के संधारण तथा समय-समय पर उसके सत्यापन को अनिवार्य बताया, जिससे कलाकृतियों के सुरक्षित संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने किसी भी कार्यक्रम में स्थानीय कला एवं कलाकारों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
विभागीय सचिव प्रणव कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी ने विभागीय सचिव का स्वागत किया तथा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। तत्पश्चात मंत्री श्री प्रसाद ने विभाग के पदाधिकारियों के साथ विभिन्न जिलों से उपस्थित जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारियों से परिचय प्राप्त किया। इसके बाद कलाकार पंजीयन की जिलावार समीक्षा की गई। भागलपुर, पूर्णिया एवं गयाजी जिलों में कलाकार पंजीयन की संख्या अपेक्षाकृत कम पाए जाने पर संबंधित जिलों को पंजीयन की प्रक्रिया में गति लाने के निर्देश दिए गए। सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन कलाकारों के पास औपचारिक प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं हैं, वे मान्यता प्राप्त कलाकारों के सत्यापन के आधार पर पंजीयन अथवा सत्यापन करा सकते हैं।
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