पटना, 24 फरवरी 2026

ग्रामीण क्षेत्र और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए अब महानगरों की दौड़भाग से जल्द छुटकारा मिल जाएगा। इसके लिए सरकार ने राज्य के 36 सदर अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी और 534 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में स्पेशियलिटी स्तर की सुविधा मुहैया कराने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत राज्य में स्वास्थ्यगत ढांचा को मजबूत बनाने और लोगों को स्थानीय स्तर पर उच्च स्तरीय जांच-इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में लिया है।

राज्य स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2025 से 2030 के बीच राज्य के सभी प्रखंड स्तरीय सीएचसी और जिला अस्पतालों में इलाज, जांच और विशेषज्ञों की सुविधा बढ़ाई जाएगी। योजना के अनुसार सीएचसी को स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाया जाएगा, जहां क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, डाइटिशियन, डेंटल, आयुष स्पेशलिस्ट, फिजिशियन, फॉर्मासिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और टेक्निशियन, ईसीजी टेक्निशियन, डेंटल असिस्टेंट, ओटी असिस्टेंट या ओटी टेक्निशियन की तैनाती होगी। वहीं, जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने के क्रम में यहां इंडोक्रोनोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन, कॉर्डियोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती होगी। इन जिला अस्पतालों में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) की स्थापना की जाएगी जहां शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों की पहचान और इलाज की सुविधा होगी।

डीईआईसी की होगी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से निगरानी
जिला अस्पतालों में बनाए जाने वाले सभी डीईआईसी का पटना स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) से जुड़ाव होगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से डीईआईसी पर दी जाने वाली सुविधाओं और गुणवत्ता की नियमित तौर पर निगरानी होगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ, फॉर्मासिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती होगी। साथ ही बच्चों की बीमारी में निदान और स्वास्थ्य से जुड़ीं दूसरी समस्याओं को लेकर प्रशिक्षण, शोध आदि कार्य किए जाएंगे।

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