पटना, 24 मार्च 2026
तीन दिनों तक बिहार की प्रगति और संस्कृति के उत्सव का केंद्र रहे 114वें बिहार दिवस समारोह का आज ऐतिहासिक गांधी मैदान में गरिमामयी समापन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि माननीय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. बी. राजेन्द्र सहित शासन-प्रशासन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

उपमुख्यमन्त्री का संबोधन: प्रगति की उपलब्धियाँ और भविष्य का रोडमैप
समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदेशवासियों को बिहार दिवस की बधाई दी और राज्य की विकास यात्रा का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा: सशक्त संकल्प: उपमुख्यमंत्री के सुदृढ़ विचारों में ‘उन्नत बिहार’ का सपना साकार होता नजर आया। उन्होंने बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास में बिहार की छलांग को गर्व का विषय बताया।
आगामी योजनाएँ: उन्होंने आगामी वर्षों के लिए सरकार के रोडमैप पर चर्चा करते हुए युवाओं के लिए स्वरोजगार और तकनीक आधारित गवर्नेंस को प्राथमिकता देने की बात कही।
शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों पर प्रकाश डाला। वहीं, अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्द्र के कुशल मार्गदर्शन में विभाग के स्टॉल्स ने आधुनिक ‘मॉडल स्कूल’ और ‘निपुण बिहार’ की सफलता की गाथा पेश की। इस अवसर पर विभाग के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन के प्रशासनिक समन्वय और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।
सांस्कृतिक संध्या: पप्पोन के सुर और कला का अनूठा संगम
समारोह के अंतिम दिन मुख्य मंच पर सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक पप्पोन (अंगराग महंत) की रूहानी आवाज़ ने हजारों दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही अन्य स्थलों पर भी कला की अविरल धारा बही:
श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल: पंडित रामजी मिश्रा का ध्रुपद गायन, डॉ. एन. विजय लक्ष्मी का भरतनाट्यम और डॉ. पाशा द्वारा प्रस्तुत ‘मिरेकल ऑन व्हील्स’।
रविंद्र भवन: चंदन तिवारी के लोक गीत, ‘बिहार दर्पण’ नृत्य नाटिका और आलोक राज व अशोक कुमार प्रसाद की गजलों ने समां बांध दिया।
साहित्यिक समागम
देर शाम तक चले ‘मुशायरा’ में 12 दिग्गज शायरों ने अपनी रचनाओं से साहित्य की महक बिखेरी, जिससे पूरा वातावरण ‘जय बिहार’ के नारों और बिहार की गौरवशाली अस्मिता की गूँज से सराबोर हो गया।
यह तीन दिवसीय आयोजन न केवल ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ की थीम को सार्थक कर गया, बल्कि एक सशक्त और आधुनिक बिहार की अमिट छाप छोड़ते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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