पटना, 03 अगस्त 2026

सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है। शास्त्रों में कहा गया है – *‘सोम’* का अर्थ है चंद्रमा, जो भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित हैं। इसलिए सोमवार को शिवजी की आराधना करने से मन शांत होता है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

*1. 16 सोमवारी व्रत का महत्व*

16 सोमवारी व्रत को ‘सोलह सोमवार व्रत’ भी कहते हैं। यह व्रत मुख्यतः अविवाहित कन्याओं और विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है, लेकिन पुरुष भी इसे कर सकते हैं।

*क्यों करते हैं?*
मान्यता है कि स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए यह कठोर व्रत किया था। इसलिए:

– *अविवाहित कन्याएं* मनचाहे, शिव जैसे वर की प्राप्ति के लिए करती हैं।

– *विवाहित महिलाएं* पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए करती हैं।

– यह व्रत लगातार 16 सोमवार तक बिना टूटे किया जाता है। अगर बीच में कोई सोमवार छूट जाए, तो फिर से नए सिरे से शुरू करना पड़ता है।

*फल क्या मिलता है?*
शिवपुराण के अनुसार इस व्रत से कुंडली का चंद्र दोष शांत होता है, वैवाहिक बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

*2. सावन की सोमवारी का विशेष महत्व*

सावन का महीना तो शिवभक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं। पुराणों के अनुसार सावन में ही माता पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए तपस्या की थी और समुद्र मंथन से निकले विष को शिव ने इसी महीने में धारण किया था।

*सावन सोमवार क्यों सबसे पवित्र है?*

– इस पूरे महीने शिवलोक पृथ्वी के सबसे निकट होता है। इस दौरान किया गया एक बेलपत्र, एक लोटा जल भी हजार गुना फल देता है।

– सावन में पड़ने वाले 4 या 5 सोमवार को महासोमवार कहा जाता है। इस दिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक का विशेष पुण्य है।

– कहते हैं, सावन में शिव की पूजा करने से पूरे साल की पूजा का फल मिल जाता है।

*व्रत विधि (संक्षेप में)*
प्रातः स्नान कर सफेद वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। दिनभर फलाहार रखें और सायंकाल में व्रत कथा सुनकर आरती करें। “ॐ नमः शिवाय” का जाप इस व्रत की आत्मा है।

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