पटना, 04 सितंबर 2026

शुक्रवार को जद (यू) प्रदेश कार्यालय में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने प्रेसवार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के संबंध में जानकारी साझा की और कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा सामने रखी। प्रेसवार्ता में बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी एवं प्रदेश प्रवक्ता नवल शर्मा भी मौजूद रहे।

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कल 5 सितंबर से पार्टी के ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है। गंगा किनारे बसे बिहार के सभी 12 जिलों में चरणबद्ध तरीके से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसकी शुरुआत बक्सर से होगी, जहां से गंगा बिहार में प्रवेश करती है, जबकि कार्यक्रम का समापन कटिहार जिले में होगा, जहां से गंगा बंगाल होते हुए बांग्लादेश की ओर जाती है।

उन्होंने कहा कि ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ के माध्यम से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा जी एवं मेरा आम लोगों, किसानों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न वर्गों से संवाद होगा। इस दौरान इस विषय पर उनकी राय और सुझाव लिए जाएंगे तथा जनभावनाओं और सुझावों को उचित मंच पर मजबूती के साथ रखने का काम किया जाएगा। 
उन्होंने कहा कि बिहार पिछले 30 वर्षों से फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि की भारी कीमत चुका रहा है। नीतीश कुमार जी लंबे समय से फरक्का के कारण बिहार को हो रहे नुकसान और बिहार के जल हितों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, लेकिन इसका 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा होने से नदी की गहराई और जलधारण क्षमता प्रभावित हुई है।  इसके चलते बिहार को हर वर्ष बाढ़़़़ की त्रासदी झेलनी पड़ती है, किसानों की फसलें तबाह होती हैं और आम जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि को लेकर हमारी पार्टी का स्पष्ट स्टैंड है कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। और यदि इसका नवीनीकरण होता भी है, तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिसमें बिहार के हितों से कोई समझौता न हो।

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