पटना, 5 सितम्बर 2026

बिहार विद्यापीठ के देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह में गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के साथ शिक्षा के बदलते स्वरूप पर भी विमर्श हुआ। समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और खेलकूद प्रतियोगिताओं ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी विजय प्रकाश ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान दौर में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षक अब केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि फैसिलिटेटर, मेंटर और प्रेरक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा की गुरु-शिष्य व्यवस्था में सीखना जीवन से जुड़ा हुआ था, जबकि औद्योगिक क्रांति के बाद शिक्षा में ‘फैक्ट्री मॉडल’ का प्रभाव दिखाई दिया। आज शिक्षा को फिर से अधिक मानवीय, रचनात्मक और अनुभवपरक बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “सीखने-सिखाने की प्रक्रिया उत्सव की तरह होनी चाहिए।” उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि विद्यार्थी में जिज्ञासा, विवेक, रचनात्मकता और जीवन-मूल्यों का विकास करना है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार विद्यापीठ ने देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राध्यापकों के उत्कृष्ट कार्य को सम्मानित करने के लिए ‘विद्यारत्न सम्मान’ की घोषणा की। इस वर्ष रजनी रंजन, मिताली मित्रा और डॉ. रीना चौधरी को ‘विद्यारत्न’ सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश ने प्रदान किया।

प्रशिक्षुओं ने अपने गुरुजनों के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया। प्रतियोगिता में सहायक प्राध्यापक कंचन कुमारी प्रथम तथा सहायक प्राध्यापक रजनी रंजन द्वितीय रहीं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में विशाल, गुनगुन और रविना के नृत्य तथा प्रियेश और अमितेश के गायन ने खूब तालियां बटोरीं। मंच संचालन अभिजय एवं अनुराधा ने किया, जबकि खेल प्रतियोगिताओं का संचालन प्रणव कुमार, वसुधा कुमारी एवं निशु रानी ने किया।

इस अवसर पर प्रशिक्षुओं ने बिहार विद्यापीठ के प्रशासनिक अधिकारियों एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों को उपहार भेंट कर उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।

समारोह में बिहार विद्यापीठ के सचिव डॉ. राणा अवधेश, वित्त सचिव डॉ. नीरज सिन्हा, अपर सचिव श्यामानन्द चौधरी, निदेशक शिक्षा, संस्कृति एवं संग्रहालय डॉ. मृदुला प्रकाश, निदेशक व्यावसायिक कौशल संजय कुमार सिन्हा, प्राचार्य डॉ. पूनम वर्मा, एआईसी के सीईओ प्रमोद कुमार कर्ण, संयुक्त सचिव अवधेश के नारायण सहित प्राध्यापकगण एवं प्रशिक्षु उपस्थित रहे।

समारोह में गुरुजनों के सम्मान के साथ भावी शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा तभी जीवंत बनती है, जब उसमें ज्ञान के साथ आनंद, संवेदना और मानवीय संबंध भी जुड़े हों।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published.