पटना,09 सितम्बर 2026

बुधवार, 9 सितंबर 2026 को खगड़िया में जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों – बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में संवाद होना है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में होगा क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है।

इस मौके पर खगड़िया के बछौता रोड स्थित शारदा फार्म हाउस में आयोजित भव्य कार्यक्रम में विधायक पन्ना लाल पटेल, विधायक बबलू मंडल, विधायक रामचन्द्र सदा, जिलाध्यक्ष अनुराधा कुमारी, प्रदेश महासचिव सह कार्यक्रम प्रभारी शंभू कुशवाहा, प्रदेश महासचिव सुनील कुमार, प्रदेश महासचिव सुमित कुमार सिंह, वरिष्ठ नेत्री साधना सदा सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारीगण और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डाॅक्यूमेट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई। साथ ही विस्तृत जानकारी वाला पम्फलेट भी बांटा गया।

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं। बिहार के हित में इस पर पुनर्विचार जरूरी है।

संजय कुमार झा ने आगे कहा कि फरक्का (गंगा) जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) तक रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है, इसका मतलब यह है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है। बिहार और केन्द्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि हमारे सर्वमान्य नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक ओर फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा हो जाने से नदी का तल ऊँचा हो गया है, जिसके कारण उत्तर बिहार को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी ओर फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में हमें बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है और हमारे कई जिलों में सूखे तक की स्थिति हो जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73% बोझ अकेले बिहार उठा रहा है और 30 वर्षों से एक साथ बाढ़़ और सूखे का दंश झेल रहा है। यह हमारे साथ ज्यादती है, जिसे हम इस अभियान के माध्यम से बताना चाहते हैं।

उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि मैं राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा जी को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने बड़़ी मुखरता से इस विषय को उठाया, इस विषय पर अखबारों में लिखा और अभी हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रयासों से आज यह मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है।

वहीं, विधायक पन्नालाल पटेल,बबलू मंडल,रामचन्द्र सदा एवं जिलाध्यक्ष अनुराधा कुमारी ने इस मौके पर कहा कि जदयू ये पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि ये हमारी पार्टी का जनसरोकार है। ये बिहार के हक और बिहारवासियों के हित की बात है। हमें पता होना चाहिए कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार को कैसे और कितना नुकसान हो रहा है। हमलोग बिहार की आवाज केन्द्र तक पहुँचाना चाह रहे हैं ताकि गंगा से जुड़े सवाल देश के सामने आएं और फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार हो।

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