पटना/दानापुर
किताबी ज्ञान जब तकनीक और बच्चों की असीम कल्पनाओं से जुड़ता है, तो नवाचार का एक नया संसार जन्म लेता है। दानापुर स्थित ‘स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निंग’ में आयोजित दो दिवसीय विज्ञान और नवाचार महोत्सव ‘इन्नोफेस्ट’ के समापन अवसर पर कुछ ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिला। महोत्सव के दूसरे दिन बाल वैज्ञानिकों ने अपने स्वचालित मॉडलों, सजीव प्रयोगों और रोबोटिक्स परियोजनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पौराणिक कथाओं और आधुनिक विज्ञान का अनूठा संगम
प्रदर्शनी में विज्ञान और रचनात्मकता का बेहतरीन तालमेल दिखा। सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र ‘माखन चोरी’ के बाद बाल कृष्ण के पीछे भागती माता यशोदा का स्वचालित (ऑटोमेटिक) मॉडल, चलता-फिरता ‘ब्लैक पैंथर’, डायनासोर और मोर रहे। बच्चों ने केवल इन मॉडलों का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि एक इंटरएक्टिव लर्निंग स्पेस का निर्माण करते हुए पूरे आत्मविश्वास के साथ इसके पीछे काम कर रहे वैज्ञानिक सिद्धांतों को आगंतुकों को भी समझाया।
रोबोटिक्स प्रतियोगिताओं ने बढ़ाई धड़कनें
विद्यालय की अटल टिंकरिंग लैब (ATL) के तहत आयोजित तकनीक आधारित प्रतियोगिताओं में भारी उत्साह देखने को मिला:
- रोबो फाइट और हर्डल रेस: कक्षा 9 के अमन और सूर्यांशु की जोड़ी ने अपनी तकनीकी दक्षता से दोनों रोमांचक प्रतियोगिताओं में बाजी मारते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- प्लेन रेस: कक्षा 2 के सत्यम और अन्वी प्रकाश संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कक्षा 2 के शिवम और कक्षा 3 के रेयांश ने तीसरा स्थान हासिल किया।
- बोट रेस: कक्षा 8 के आदित्य ने प्रथम, कक्षा 2 के रौनक ने द्वितीय और कक्षा 3 के रेयांश ने तृतीय स्थान प्राप्त कर शानदार प्रदर्शन किया।
तकनीक और ‘लर्निंग बाय डूइंग’ पर विशेषज्ञों की राय
डी. वाई. पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. प्रभात रंजन ने बाल वैज्ञानिकों की प्रतिभा को सराहते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि बच्चों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित परियोजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि वे बदलती दुनिया की तकनीक का रचनात्मक उपयोग कर सकें।

एपीसीएल (APCL) के अध्यक्ष विजय प्रकाश ने व्यावहारिक ज्ञान पर जोर देते हुए कहा, “अपने हाथों से बनाई गई कार की रेस का आनंद ही कुछ और होता है।” उन्होंने बताया कि विद्यालय में बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडलों का उपयोग बाद में खेल और शिक्षण सामग्री के रूप में किया जाता है, जिससे उनमें ‘बनाकर सीखने’ (Learning by Doing) की मजबूत प्रवृत्ति विकसित होती है। विद्यालय की प्राचार्या डॉ. मृदुला प्रकाश ने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में वैज्ञानिक सोच और विचारों को अभिव्यक्त करने का आत्मविश्वास मजबूत होता है।

देश-विदेश के अतिथियों ने बढ़ाया उत्साह
इस विज्ञान महोत्सव में सिंगापुर से आए अतिथि हिमाद्रि मयंक, श्रुति कुमारी, विहान और अस्मि ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा कर बच्चों की जमकर तारीफ की। वहीं, पुणे स्थित डी. वाई. पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से आए वरिष्ठ प्रबंधक नमन कुमार और प्रो. सुरभि सोनम ने भी बच्चों का तकनीकी मार्गदर्शन करते हुए उनके नवाचारों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
शिक्षकों के अनुसार, इन गतिविधियों ने बच्चों को केवल तकनीक ही नहीं सिखाई, बल्कि समस्या-समाधान, तार्किक चिंतन और असफलता से सीखकर आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान किया है। इसी उत्साह और उमंग के साथ दो दिवसीय ‘इन्नोफेस्ट’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
![]()
