पटना/दानापुर, 26 सितम्बर 2026
दानापुर स्थित स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के व्यावहारिक उपयोग पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला ‘यूज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ का आयोजन किया गया।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारत सरकार के टाइफैक (TIFAC) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एवं प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. प्रभात रंजन थे। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के चेयरमैन विजय प्रकाश ने मुख्य अतिथि का स्वागत कर की। उन्होंने कहा कि “वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही प्रगति की असली कुंजी है” और समाज व राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिकों की भूमिका अहम है।
मुख्य वक्ता प्रो. प्रभात रंजन ने छात्रों को एआई की उपयोगिता, वर्तमान प्रासंगिकता और भविष्य की संभावनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “आज का दौर तकनीक और एआई का दौर है। दैनिक जीवन से लेकर अनुसंधान तक, हर क्षेत्र में एआई सबसे महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है। विद्यार्थियों को समय की मांग समझते हुए एआई का अध्ययन करना चाहिए और खुद को निरंतर अपडेट करते रहना चाहिए।”
उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से काम करने की आदत डालने पर जोर देते हुए कहा कि इसी से वे बड़े वैज्ञानिक या इनोवेटर बन सकते हैं। आम जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं का गहराई से अध्ययन ही बड़ी समस्याओं के समाधान का रास्ता है।
समापन सत्र में प्राचार्या डॉ. मृदुला प्रकाश ने प्रो. रंजन का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उनके विचारों को केवल सुनना ही काफी नहीं, बल्कि जीवन और अध्ययन में अपनाना होगा। उन्होंने तकनीक के जिम्मेदार और सकारात्मक उपयोग पर बल दिया।
कार्यशाला में बड़ी संख्या में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
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