पटना, 9 अक्टूबर 2026
बिहार विद्यापीठ: देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदाकत आश्रम, पटना द्वारा आज 9 अक्टूबर को अपराह्न 2 बजे महाविद्यालय परिसर में ‘प्लास्टिक-मुक्त परिसर जागरूकता अभियान’ के अंतर्गत स्लोगन लेखन एवं रैली कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर बिहार विद्यापीठ के सचिव डॉ राणा अवधेश भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत्त पदाधिकारी, निदेशक, शिक्षा संस्कृति एवं संग्रहालय डॉ मृदुला प्रकाश, संयुक्त सचिव अवधेश के नारायण, तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पूनम वर्मा, एवं सहायक प्राध्यापकगण डॉ प्रतिमा कुमारी,डॉ रीना चौधरी, रजनी रंजन, रिम्पल कुमारी, डॉ शादमा शाहीन, चन्द्रकान्त आर्य, सौरभ भारद्वाज, सुधीर कुमार ने सामूहिक रूप रैली को नारा लगाते हुए प्रस्थान किया।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं परिसर में आने वाले लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल परिसर के निर्माण के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग मिट्टी, जल, वायु और जीव-जगत के लिए गंभीर चुनौती है। विशेष रूप से एकल-उपयोग प्लास्टिक पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ाता है और उसके अवशेष लंबे समय तक प्रकृति को नुकसान पहुँचाते हैं। इसलिए प्लास्टिक के विकल्पों को अपनाना, कपड़े अथवा जूट के थैलों का उपयोग करना, कचरे का उचित पृथक्करण करना तथा पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। इस अवधारणा को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए उपस्थित प्रशिक्षुओं, प्राध्यापकों एवं पदाधिकारियों द्वारा लिया गया।

इस संकल्प का आशय था-स्वच्छ परिसर, स्वस्थ पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य के लिए प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग से बचें तथा पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ।

स्लोगन लेखन के माध्यम से विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाएँगे। इस गतिविधि का उद्देश्य केवल परिसर को प्लास्टिक-मुक्त बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, नागरिक कर्तव्यबोध और सतत जीवनशैली की समझ विकसित करना भी है।
अभियान का प्रेरक संदेश है— “प्लास्टिक भगाओ, कैंपस बचाओ।” इसके साथ ही “एक कलम, एक स्लोगन, प्लास्टिक मुक्त कैंपस” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया।
![]()
