नई दिल्ली 12 अगस्त 2026

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में सांसदों और अन्य जन प्रतिनिधियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘हर घर तिरंगा’ बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह रैली भारत मंडपम से मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम तक गई, जिसने राष्ट्रीय गौरव, एकता और नागरिक भागीदारी का संदेश दिया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया और भारत के स्वतंत्रता संग्राम की भावना की सशक्त अभिव्यक्ति बन गया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे इसके अमर शब्दों ने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को साहस, बलिदान और आशा से प्रेरित किया।

उपराष्ट्रपति ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अपनी हालिया यात्रा को याद करते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप और ऐतिहासिक सेलुलर जेल का उनका दौरा अत्यंत भावपूर्ण रहा। उन्होंने 1943 में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने और सेलुलर जेल में कैद स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को याद किया, जिनमें से कई ने वंदे मातरम के नारे के साथ फांसी को गले लगाया।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रगान वंदे मातरम के राष्ट्रव्यापी प्रभाव को रेखांकित करते हुए सी.पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय कवि सुब्रमण्यम भारती सहित वी.ओ. चिदंबरम पिल्लई, सुब्रमण्यम शिव, तिरुप्पुर कुमारन और वंचिनाथन जैसे तमिलनाडु के स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं के योगदान और बलिदानों को याद किया, जिन्होंने वंदे मातरम की भावना और संदेश को आम लोगों तक पहुंचाया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2022 में शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा अभियान’ एक जन आंदोलन में तब्दील हो चुका है, जिसमें नागरिक तिरंगा यात्राओं, बाइक और साइकिल रैलियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारी मातृभूमि की भावना को मूर्त रूप देता है। उन्होंने सांसदों और जन प्रतिनिधियों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में इस अभियान को बढ़ावा देने और नागरिकों को गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

इस रैली में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजीव रंजन सिंह, वीरेंद्र कुमार, जी. किशन रेड्डी, किरेन रिजिजू और जितेंद्र सिंह के साथ-साथ संसद सदस्यों और अन्य जन प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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