पटना 24 अक्टूबर 2026
बिहार विद्यापीठ परिसर स्थित देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में आज डी.एल.एड. पाठ्यक्रम सत्र 2025–2027 के प्रशिक्षुओं द्वारा निर्मित शिक्षण अधिगम सामग्री (टी.एल.एम.) की प्रदर्शनी ‘कबाड़ से बेहतरीन’ (Waste to Best) का आयोजन रजनी रंजन सहायक प्राध्यापक के समन्वय में किया गया। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य अनुपयोगी एवं बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का पुनः उपयोग कर उपयोगी, आकर्षक और रचनात्मक शिक्षण अधिगम सामग्री तैयार करना तथा प्रशिक्षुओं में नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सदुपयोग की भावना विकसित करना था।

बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त वरिष्ठ पदाधिकारी विजय प्रकाश ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रशिक्षुओं द्वारा कबाड़ से तैयार किए गए विभिन्न शिक्षण मॉडलों, शैक्षिक उपकरणों और उपयोगी वस्तुओं की सराहना करते हुए उन्होंने प्रदर्शनी को और अधिक उत्कृष्ट एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। उन्होंने रचनात्मकता को शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने, सामग्री की उपयोगिता बढ़ाने तथा उसे विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक खेलों की महत्ता एवं उपयोगिता के साथ साथ उसके बनाने की विधियों को भी साझा किया।

बिहार विद्यापीठ के सचिव डॉ राणा अवधेश, भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवा निवृत्त पदाधिकारी, अपर सचिव श्यामानन्द चौधरी, वित्त सचिव डॉ नीरज सिन्हा, संयुक्त सचिव अवधेश के नारायण, निदेशक, (शिक्षा , संस्कृति एवं संग्रहालय)डॉ मृदुला प्रकाश, निदेशक (लोक स्वास्थ्य) अजीत कुमार सिंह, तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पूनम वर्मा, सहित सभी सहायक प्राध्यापक ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

प्रदर्शनी में प्रशिक्षुओं ने यह प्रदर्शित किया कि सीमित संसाधनों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनुपयोगी वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग करके कम लागत में प्रभावी शिक्षण-सामग्री तैयार की जा सकती है। इस प्रकार की गतिविधियाँ भावी शिक्षकों में नवाचार, समस्या-समाधान, व्यावहारिक कौशल और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में सहायक हैं।
प्रदर्शनी ने इस विचार को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया कि शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक नहीं, बल्कि नवाचार का संवाहक भी होता है। ‘कबाड़ से बेहतरीन’ की अवधारणा संसाधनों के पुनः उपयोग, सतत विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के बीच सार्थक समन्वय स्थापित करती है।
महाविद्यालय की यह पहल शिक्षक-प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक, सृजनात्मक और पर्यावरण-संवेदी बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
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