नई दिल्ली 12 अगस्त 2026
केन्द्रीय वित्त तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने आज जयपुर में हो रही ब्रिक्स के सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों एवं केन्द्रीय बैंक के गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की बैठक के दौरान “द रोल ऑफ द न्यू डेवलपमेंट बैंक इन मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल इन मेंबर कंट्रीज” विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य भाषण दिया।

महामहिम डिल्मा रूसेफ ने एक विशेष संबोधन दिया, जिसमें वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) की सचिव अनुराधा ठाकुर और फिक्की के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विजय शंकर भी शामिल हुए।
अपने मुख्य भाषण में, केन्द्रीय वित्त मंत्री ने निवेश के जोखिम को कम करने, परियोजना को बैंक के लिए आकर्षक बनाने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में बहुपक्षीय विकास बैंकों की अहम भूमिका पर जोर दिया, ताकि बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाई जा सके।
भारत के अनुभव के बारे में बात करते हुए,सीतारमन ने कहा कि भारत सरकार ने निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और उससे जुड़े संरचनात्मक सुधारों के जरिए अपने अवसंरचना इकोसिस्टम को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले की तुलना में सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स प्रणालियों, डिजिटल अवसंरचना और ऊर्जा नेटवर्कों में उत्पादक राष्ट्रीय परिसंपत्तियां बनाने की एक सोची-समझी रणनीति को दर्शाता है।
वित्त मंत्री सीतारमन ने कहा कि भारत सरकार का मानना है कि सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश का विकल्प नहीं, बल्कि उसके उत्प्रेरक के तौर पर कार्य करना चाहिए। इसी सिद्धांत के समर्थन में भारत सरकार ने विभिन्न सुधार किए हैं:

- आर्थिक रूप से सीमित लेकिन सामाजिक रूप से वांछनीय परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करने हेतु व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण [वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ)];
- सड़क बुनियादी ढांचे में जोखिम को संतुलित रूप से बांटने हेतु हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (एचएएम);
- परियोजना की बैंक से ऋण मिलने की योग्यता (बैंकेबिलिटी) को बेहतर बनाने हेतु क्रेडिट बढ़ाने वाले उपाय;
- पूंजी को दोबारा उपयोग करने और दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने हेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इंविट्स);
- नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन, जो निवेशकों को दीर्घकालिक स्पष्टता प्रदान करती है;
- पीएम गति शक्ति – मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान, जो तालमेल और कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है।
इसी आधार को आगे बढ़ाते हुए, केन्द्रीय वित्त मंत्री ने बताया कि केन्द्रीय बजट 2026-27 में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न लक्षित उपाय किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
- नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
- नए राष्ट्रीय जलमार्गों को शुरू करना, और
- तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना
वित्त मंत्री सीतारमन ने माना कि ब्रिक्स के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास के मुख्य इंजन हैं, वहीं बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने में उन्हें एक जैसी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। चुनौती सिर्फ पूंजी की उपलब्धता की ही नहीं, बल्कि भरोसा, स्थिरता, पूर्वानुमेयता और विश्वसनीय दीर्घकालिक ढांचे तैयार करने की भी है, जो सदस्य देशों में निजी क्षेत्र की निरंतर भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु जरूरी हैं।
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने अपने मुख्य भाषण का समापन करते हुए, इस बात पर जोर दिया कि विकासात्मक वित्त का भविष्य साझेदारी में निहित है। बहुपक्षीय संस्थाओं, राष्ट्रीय सरकारों और निजी क्षेत्र सहित सभी की अपनी-अपनी विशिष्ट खूबियां हैं।
इससे पहले अपने स्वागत भाषण में, आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि आज का सेमिनार खास तौर पर प्रासंगिक है, क्योंकि विकासात्मक वित्त अब ऐसे दौर में है जहां बड़े पैमाने पर काम करने के साथ-साथ मजबूती भी जरूरी है। पूंजी जुटाना सिर्फ अनुकूल परिस्थितियों पर ही निर्भर नहीं हो सकता। इसे ऐसे ढांचों पर आधारित होना चाहिए जो लंबे समय तक टिके रहें। ऐसे ढांचों को मजबूत करने में ही बहुपक्षीय सहयोग से लंबे समय तक चलने वाला लाभ मिल सकता है।
इस सेमिनार में वरिष्ठ नीति निर्माता, बहुपक्षीय संस्थाओं और निजी कंपनियों के प्रमुख एक साथ आए। इसके बाद आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ; एनडीबी के वाइस-प्रेसिडेंट रोमन सेरोव; सर्ट्रेडिंग के एलेसेंड्रो टेक्सीरा; टेनसेंट के सीनियर एडवाइजर योंगपिंग झाई; टाटा कैपिटल डिकार्बनाइजेशन फंड के पंकज सिंडवानी; और ब्रिक्स के सदस्य देशों, वित्तीय संस्थाओं, थिंक टैंक और अकादमिक जगत के अन्य प्रतिनिधियों के साथ एक विस्तृत पैनल चर्चा हुई।
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