पटना,09 अक्टूबर 2026

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को पटना स्थित प्रदेश कार्यालय के कर्पूरी सभागार में जनता दल (यू) द्वारा ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों – बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार – में संवाद निर्धारित है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में होगा क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है।

कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उपनेता ललन कुमार सर्राफ, मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह विधायक श्याम रजक, विधायक एवं कार्यक्रम प्रभारी अरुण मांझी, महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष सह विधान पार्षद शिवरानी देवी प्रजापति, विधान पार्षद सह प्रवक्ता डा0 भारती मेहता, विधान पार्षद ललन मंडल, डा0 नवीन आर्या, डा0 अमरदीप, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी अंजुम आरा, शंभू कुशवाहा, अरुण वर्मा, प्रदेश महासचिव अनिल कुमार, अरुण कुमार सिंह, विनोद सिंह, नंदकिशोर कुशवाहा, लोकप्रकाश सिंह एवं यासमिन खान सहित पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान फरक्का बैराज एवं फरक्का जल संधि से बिहार पर पड़ने वाले प्रभावों पर आधारित पार्टी द्वारा तैयार डाॅक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की गई। साथ ही, इस विषय से संबंधित विस्तृत जानकारी देने वाला पम्फलेट भी वितरित किया गया।
वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता पटना ग्रामीण के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने की। मंच संचालन पटना महानगर अध्यक्ष राधेश्याम कुशवाहा ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन युवा प्रदेश अध्यक्ष नीतीश पटेल ने किया।

इस मौके पर संजय कुमार झा ने कहा कि फरक्का जल संधि के निर्धारण के दौरान बिहार के हितों की अनदेखी की गई। संधि के प्रावधानों के अनुसार, शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है। 1100 क्यूमेक पानी बिहार की आंतरिक नदियों का पानी होता है। श्री झा ने कहा कि बिहार और केंद्र की तत्कालीन सरकारों ने इस संधि के दौरान राज्य के हितों की बलि चढ़ाने का काम किया और इसके दूरगामी प्रभावों पर विचार नहीं किया गया कि इससे बिहार के किसानों की सिंचाई, आम लोगों के पेयजल, उद्योगों की जल आवश्यकताओं, लाखों लोगों की आजीविका और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है। आज बिहार में नए उद्योग और कल-कारखाने स्थापित हो रहे हैं, जिससे पानी की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में, यदि संधि का नवीनीकरण होता है, तो वर्ष 2050 तक बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से ही कहते रहे हैं कि फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह संधि बिहार और देश के हित में नहीं है। एक ओर, फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से नदी का तल ऊँचा हो गया है, जिससे उत्तर बिहार को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। वहीं, फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है, जिससे राज्य के कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसका बिहार की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है और पिछले 30 वर्षों से राज्य बाढ़ और सूखे, दोनों का दंश झेल रहा है। श्री कुशवाहा ने कहा कि वे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनके प्रयासों से आज बिहार के जल हितों से जुड़ा यह महत्वपूर्ण मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है।

ललन कुमार सर्राफ ने कहा कि फरक्का जल संधि बिहार के जल हितों पर कुठाराघात है, जिसका नुकसान राज्य लंबे समय से झेल रहा है। बिहार के हिस्से के पानी का बांग्लादेश को हस्तांतरण होने से राज्य के जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आवश्यक है कि बिहार के अगले 50 वर्षों की जल आवश्यकताओं और हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।

श्याम रजक ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने बिहार के जल हितों की अनदेखी की। अब पार्टी ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के माध्यम से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जनजागृति का अभियान चला रही है। इस पहल को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और बिहार के जल अधिकारों से जुड़े सवालों पर जनभागीदारी बढ़ रही है।

संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी ने कहा कि फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि के कारण बिहार को गंभीर नुकसान उठाना पड़ रहा है। राज्य एक ओर बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर जल की कमी के कारण सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। अब इसके निराकरण हेतु आवश्यक पहल किए जाने की आवश्यकता है।

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